भदोही। उत्तर प्रदेश के कालीन नगरी कहे जाने वाले भदोही जिले की पहचान एक बार फिर बदलने जा रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को जिले का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर भदोही’ करने का बड़ा ऐलान किया. सीएम योगी भदोही में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कारपेट एक्सपो में शामिल होने पहुंचे थे, जहां प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद उन्होंने मंच से यह घोषणा की.
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महान संत रविदास जी के सम्मान और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अब जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा. सीएम के इस फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर नाम बदलने की औपचारिकताएं शुरू की जा रही हैं.
1994 में वाराणसी से कटकर नया जिला बनने के बाद यह चौथा मौका है, जब इसका नाम बदला जा रहा है. 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले आए इस फैसले को दलित समुदाय को साधने की एक अहम राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.
1994 से अब तक: नाम बदलने की पूरी कहानी
भदोही जिले का नामकरण शुरुआत से ही सियासत और सत्ता परिवर्तन का गवाह रहा है. जिले के गठन से लेकर अब तक इसका नाम कई बार बदला जा चुका है:
30 जून 1994: मुलायम यादव की सपा सरकार ने वाराणसी से अलग कर पहली बार ‘भदोही’ नाम से नया जिला बनाया.
4 दिसंबर 1997: मायावती की बसपा सरकार ने इसका नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ किया.
12 नवंबर 1999: भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता ने दोनों पक्षों की भावनाओं को जोड़ते हुए इसका नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ कर दिया.
6 दिसंबर 2014: अखिलेश यादव की सपा सरकार ने एक बार फिर बदलाव करते हुए जिले का नाम वापस केवल ‘भदोही’ कर दिया था.
4 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर भाजपा के पुराने फैसले को दोहराते हुए इसका संयुक्त नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ करने की घोषणा कर दी है.
सीएम योगी के इस फैसले के बाद कालीन उद्योग और स्थानीय राजनीतिक गलियारों में इस ऐतिहासिक फैसले की जोरदार चर्चा शुरू हो गई है.












