भोपाल: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है “अपने देश की न्याय प्रणाली पहले देरी के लिए जानी जाती थी. लेकिन अब बदलाव हुआ है. भारतीय न्याय संहिता (BNS) पूरी तरह लागू होने के बाद बाद FIR दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक न्याय 3 साल के भीतर मिल जाएगा.”
BNS का मूल सिद्धांत न्याय दिलाना
भोपाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नए आपराधिक कानून पर प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद पशुपालकों के राज्य-स्तरीय सम्मेलन में ये बात कही. उन्होंने कहा “अंग्रेजों ने जो कानून बनाए थे, वे उनकी सरकार और उनके शासन की रक्षा के लिए लाए गए थे. नया आपराधिक कानून भारत के नागरिकों की गरिमा की रक्षा के लिए लाया गया है. इसका मूल सिद्धांत न्याय है, सजा नहीं. सजा केवल वहीं दी जाती है जहां यह जरूरी हो, ताकि अपराध करने वालों को रोका जा सके.”
नए कानूनों में न्याय को प्राथमिकता
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा “BNS के पूरी तरह लागू होने के बाद देश में आपराधिक न्याय तंत्र दुनिया में सबसे आधुनिक हो जाएगा. नए कानूनों में दंड की जगह न्याय को प्राथमिकता मिलेगी, देरी की जगह स्पीडी ट्रायल और स्पीडी जस्टिस मिलेगा और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी. नए कानूनों के आधार में दंड की जगह न्याय, देरी की जगह त्वरित ट्रायल और त्वरित न्याय को रखा गया है. पहले के कानूनों में सिर्फ पुलिस के अधिकारों की रक्षा की गई थी लेकिन इन नए कानूनों में अब पीड़ितों और शिकायतकर्ता के अधिकारों की भी रक्षा करने का प्रावधान है.”
बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा पर जोर
उन्होंने कहा “नए कानूनों में सबसे पहली प्राथमिकता महिलाओं व बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को दी गई है. बच्चों व महिलाओं के प्रति अपराध पर नया अध्याय, जिसमें 35 धाराएं और 13 प्रावधान हैं, जोड़कर इसे और भी संवेदनशील बनाया गया है. इसी प्रकार मॉब लिंचिंग के अपराध के लिए पहले के कानून में कोई प्रावधान नहीं था लेकिन इन कानूनों में पहली बार बार मॉब लिंचिंग को परिभाषित और इसके लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान किया गया है.”
कांग्रेस ने नहीं बनने दिया सहकारी मंत्रालय
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा “जब से देश को आजादी मिली है, कृषि व्यवस्था, ग्रामीण विकास और सहकारी समितियों से जुड़े लोग एक स्वतंत्र सहकारी मंत्रालय की मांग कर रहे थे. कांग्रेसी नेताओं ने 75 वर्षों तक इसे बनने नहीं दिया. अगर सहकारी मंत्रालय के गठन से किसी को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है, तो वे पशुपालक होंगे. पीएम मोदी के कार्यकाल में दूध उत्पादन में भी तेजी आई है. 2014-15 में भारत का कुल दूध उत्पादन 14.7 करोड़ टन था. 75 वर्षों में यह केवल 14.7 करोड़ टन तक पहुंचा था. मोदी जी ने इसे 10 वर्षों में बढ़ाकर 25 करोड़ टन करने के लिए कड़ी मेहनत की.”












