नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को पूर्ववर्ती सरकार पर छात्रवृत्ति में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि 2016-17 में अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति तक नहीं भेजी गई थी। उन्होंने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद पिछली बकाया छात्रवृत्ति भी विद्यार्थियों तक पहुंचाई गई। अब डीबीटी के जरिए छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि सीधे पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। मुख्यमंत्री ने लोक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में 4,60,559 छात्र-छात्राओं के खातों में 148.04 करोड़ रुपए की राशि भेजी।
70 लाख विद्यार्थियों तक छात्रवृत्ति पहुंचाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और इस वर्ष 70 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले वर्ष 69 लाख विद्यार्थियों को करीब 6,200 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति दी गई थी, जबकि 2017 से पहले इस मद में करीब 2,900 करोड़ रुपए खर्च होते थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र विद्यार्थियों तक हर हाल में 26 जनवरी तक छात्रवृत्ति पहुंच जाए।
चार लाख वंचित विद्यार्थियों को भी मिलेगा लाभ
योगी ने बताया कि पिछले वर्ष आवेदन या तकनीकी खामियों के कारण छात्रवृत्ति से वंचित करीब चार लाख विद्यार्थियों को भी इस बार योजना का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धन के अभाव में किसी विद्यार्थी की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए और पात्र छात्रों तक समय से राशि पहुंचाने में सरकार के सामने धन की कमी नहीं है।
ओबीसी और एससी विद्यार्थियों को सबसे अधिक राशि
शनिवार को जारी 148.04 करोड़ रुपए में अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 विद्यार्थियों के खातों में 60.01 करोड़ रुपए भेजे गए। अनुसूचित जाति के 1,59,959 विद्यार्थियों को 64.54 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति मिली। सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों को 11.43 करोड़ रुपए और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों को 12.06 करोड़ रुपए की राशि मिली।
11 विद्यार्थियों को मंच से दिए प्रमाणपत्र
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र भी प्रदान किए। प्रमाणपत्र पाने वाले विद्यार्थियों में रणबीर वर्मा, अजीत रावत, अंश मिश्रा, अलकैफ, अनन्या अवस्थी, मिली, अधिकांश वर्मा, करिश्मा, बुशरा, अभिषेक यादव और साइमा शामिल रहे। मुख्यमंत्री के हाथों प्रमाणपत्र मिलने पर विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी नजर आई।
ऑनलाइन व्यवस्था से खत्म हुई बिचौलियों की भूमिका
सरकार ने छात्रवृत्ति के आवेदन से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। आधार आधारित भुगतान प्रणाली के जरिए धनराशि सीधे पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है। आधार आधारित पैकेट सिस्टम के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दावा किया गया है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और विद्यार्थियों को योजना का लाभ लेने के लिए अनावश्यक दौड़भाग नहीं करनी पड़ रही है।
2025-26 में 65.95 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ
प्रदेश सरकार के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में 65.95 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को 4,793 करोड़ रुपए से अधिक की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दी जा चुकी है। योजना में अल्प आय वर्ग के पूर्वदशम यानी कक्षा 9 और 10 तथा दशमोत्तर कक्षाओं में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों को शामिल किया गया है।
छात्रवृत्ति को किताबों और पढ़ाई पर खर्च करने की सलाह
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति की राशि का फिजूल खर्च न करने और उससे अच्छी किताबें खरीदकर अपना बुक बैंक तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक अभाव किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा नहीं बनना चाहिए।
2017 से पहले की व्यवस्था पर साधा निशाना
योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में युवाओं के सामने पहचान का संकट था। दंगे और कर्फ्यू होते थे तथा कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापारी और बेटियां असुरक्षित महसूस करते थे। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश बीमारू राज्य की पहचान से बाहर निकलकर रेवेन्यू सरप्लस स्टेट और देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन रहा है। उन्होंने कहा, “नो कर्फ्यू, नो दंगा, अब यूपी में है सब चंगा।”
छह महीने में एक लाख और नौकरियों का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब तक 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है और अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं हो रही हैं, परिणाम जारी हो रहे हैं और युवाओं को नौकरियां मिल रही हैं।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार का किया उल्लेख
योगी ने कहा कि 2017 से पहले बेसिक शिक्षा में ड्रॉपआउट दर 19 से 20% तक थी। ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए स्कूलों में शौचालय, पेयजल, फर्नीचर, स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के 1.60 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, किताब, जूते-मोजे और स्वेटर के लिए धनराशि दी जा रही है।
अटल आवासीय और कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जहां 18 हजार श्रमिक और निराश्रित बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं 746 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चल रहे हैं। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 2,300 से अधिक विद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
युवाओं को 2047 की जिम्मेदारी के लिए तैयार करने पर जोर
योगी ने विद्यार्थियों से परिश्रम को अपनी ताकत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 15 से 18 वर्ष की आयु के विद्यार्थी वर्ष 2047 में देश की कामकाजी शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे और विकसित भारत के निर्माण में उनकी बड़ी भूमिका होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
दो करोड़ युवाओं को टैबलेट देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दो करोड़ युवाओं को टैबलेट देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 60 लाख युवाओं को अब तक टैबलेट मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि मेधावी बेटियों को अगले महीने 50 हजार स्कूटी देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटी के जन्म से स्नातक तक 25 हजार रुपए की सहायता दी जा रही है।
अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए भी छात्रवृत्ति पर जोर
मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि नौ वर्षों में अल्पसंख्यक समाज के 39 लाख से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के माध्यम से अल्पसंख्यक समाज को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है। राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण ने कहा कि तकनीकी खामियों के कारण छात्रवृत्ति से छूटे विद्यार्थियों को अभियान चलाकर योजना से जोड़ा गया है।
36.75 लाख ओबीसी विद्यार्थियों को मिली छात्रवृत्ति
राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कुमार कश्यप ने बताया कि शनिवार के लाभार्थियों में 2,23,615 विद्यार्थी पिछड़ा वर्ग से हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में 36.75 लाख ओबीसी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई है। राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि पहले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए ज्ञापन और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जबकि अब उन्हें समय पर योजना का लाभ मिल रहा है।












