लखनऊ। यूपी में विधान परिषद (एमएलसी) के शिक्षक और स्नातक सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को छह नामों का ऐलान कर दिया। इससे पहले सोमवार को ही समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की थी। इसके साथ ही प्रदेश की दोनों मुख्य पार्टियों के बीच मुकाबले की जमीन और योद्धा तय हो गए हैं। यूपी में कुल 11 सीटों पर चुनाव होना है। भाजपा पांच नाम पहले ही घोषित कर चुकी है। सपा के भी सभी 11 प्रत्याशियों का ऐलान हो चुका है। मंगलवार से ही नामांकन का दौर भी शुरू हो गया है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि छह अक्तूबर है।
भाजपा ने वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह को मैदान में उतारा है। मेरठ स्नातक के लिए दिनेश गोयल और इलाहाबाद-झांसी स्नातक के लिए अशोक कुमार राठौर पर दांव लगाया गया है। इसी तरह वाराणसी शिक्षक सीट पर प्रमोद मिश्रा को मौका दिया गया है। आगरा में शिक्षक सीट पर इंजीनियर हरि किशोर त्रिपाठी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर घ्रुव त्रिपाठी को उतारा गया है।
सपा ने एमएलसी चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किए
इससे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधान परिषद चुनाव के लिए सोमवार को प्रत्याशियों की अधिकृत घोषणा करते हुए उनका परिचय भी कराया।मिर्जापुर-वाराणसी शिक्षक खंड के प्रत्याशी वर्तमान एमएलसी लाल बिहारी यादव, लखनऊ खंड शिक्षक क्षेत्र से प्रत्याशी सुशील कुमार, आगरा खंड शिक्षक क्षेत्र के प्रकाशचंद्र गुप्ता, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र से कमलेश यादव, मुरादाबाद-बरेली शिक्षक क्षेत्र से दानिश अख्तर, मेरठ खंड शिक्षक क्षेत्र से नितिन तोमर प्रत्याशी हैं। वाराणसी खंड स्नातक क्षेत्र से प्रत्याशी वर्तमान एमएलसी आशुतोष सिन्हा, झांसी स्नातक क्षेत्र से प्रत्याशी डा. मान सिंह, आगरा खंड स्नातक क्षेत्र से शशांक यादव, मेरठ खंड स्नातक क्षेत्र से परमिंदर भाटी, लखनऊ स्नातक क्षेत्र से कांति सिंह को उम्मीदवार बताते हुए चुनाव जिताने की अपील की।
राज्यसभा के लिए भी दोनों दलों में मंथन
विधानपरिषद के लिए प्रत्याशियों के ऐलान के साथ ही अब राज्यसभा के प्रत्याशियों पर मंथन हो रहा है। दस सीटों पर चुनाव होना है। भाजपा सात और सपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है। भाजपा को आठवीं और सपा को तीसरी सीट के लिए क्रास वोटिंग करानी होगी। बताया जाता है कि मंगलवार को भाजपा ने आठ और सपा ने दो पर्चे खरीदे हैं।
सपा के पक्ष में वोटों का समीकरण
राज्यसभा के लिए अंकों का गणित देखें तो सपा के पक्ष में दिखता है। सदस्य संख्या के हिसाब से सपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है। वैसे तो मौजूदा समय सपा विधायकों की सूची में 101 नाम है, लेकिन इनमें से छह नाम ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत की थी। इस हिसाब से वास्तविक रूप से 95 ही बचते हैं, लेकिन महाराजी प्रजापति के साथ आने से यह संख्या 96 होगी। पल्लवी पटेल के साथ देने की स्थिति में यह संख्या 97 हो जाएगी।
इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के दो विधायक हैं। इसे मिलाकर संख्या 99 तक पहुंचती है और सुभाषपा के दो विधायक भी सपा के साथ बताए जा रहे हैं। अगर इन्हें मिला जाए तो सपा के पास कुल 101 वोट हो जाते हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि क्रास वोट करने वाले तीन अन्य विधायकों ने भी सपा का साथ देने का वादा किया है। अगर ये साथ देते हैं तो इन्हें मिल कार सपा सदस्य संख्या 104 तक पहुंच जाएगी। एक सदस्य जिताने के लिए 37 विधायक चाहिए। दो सदस्यों को जिताने के लिए 74 विधायक चाहिए। इसके बाद भी सपा के पास करीब 30 विधायक अतिरिक्त बचेंगे। इसीलिए माना जा रहा है कि सपा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारकर चुनाव को रोचक बनाएगी। इससे क्रास वोटिंग की संभावना भी बढ़ेगी।












