नई दिल्ली। केंद्र सरकार स्कूलों के आसपास जंक फूड पर बड़ा प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है. नई प्रस्तावित नीति के तहत स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, शुगर और साल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों, जैसे चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स बर्गर, नूडल्स और पैकेज्ड स्नैक्स की बिक्री और विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी.
इस कदम का खास मकसद बच्चों को कम उम्र में ही ज्यादा नमक, चीनी और वसा वाले खाने से दूर रखना है. ऐसे में प्रस्तावित व्यवस्था का असर स्कूलों के आसपास मौजूद दुकानों और खाने-पीने के स्टॉल पर पड़ सकता है. हालांकि, इन नियमों को लेकर कारोबारियों की तरफ से कमाई पर असर को लेकर चिंता भी जताई गई है.
FSSAI ने फैट, चीनी और नमक की सीमा भी बताई
FSSAI के 2026 के ड्राफ्ट के मुताबिक, ठोस खाद्य पदार्थ में 100 ग्राम पर 4.2 ग्राम से ज्यादा फैट होने पर उसे हाई फैट माना जाएगा. वहीं, 100 ग्राम ठोस खाद्य पदार्थ में 3 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त चीनी होने पर वह हाई शुगर कैटेगरी में आएगा. नमक के लिए 100 ग्राम ठोस खाद्य पदार्थ में 0.625 ग्राम से ज्यादा की सीमा तय की गई है.
क्यों लाए जा रहे हैं ऐसे नियम?
सरकार की ओर से इस तरह के नियम लाने के पीछे बच्चों में बढ़ते मोटापे और जयदा फैट वाले खान-पान की आदतों को लेकर चिंता जताई जा रही है. इस प्रस्ताव का खास मकसद बच्चों को कम उम्र से ही संतुलित और बेहतर खान-पान की आदतों की ओर बढ़ाना है. सरकार कहना है कि स्कूल बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा हैं, इसलिए FSSAI स्कूलों और उनके आसपास मिलने वाले खाद्य पदार्थों को लेकर नियमों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है.
स्कूलों के आसपास दुकानदारों पर क्या होगा असर?
स्कूलों के आसपास आमतौर पर बड़ी संख्या में छोटी दुकानें, किराना स्टोर और खाने-पीने के स्टॉल होते हैं. ऐसे में अगर इन जगहों पर HFSS उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाती है, तो कारोबारियों को अपनी बिक्री का तरीका बदलना पड़ सकता है.
अभी लागू नहीं हुआ है नया नियम
सबसे अहम बात यह है कि 50 मीटर के दायरे में जंक फूड पर रोक को लेकर अभी आखिरी नियम लागू नहीं हुआ है. FSSAI ने फिलहाल इससे जुड़े नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है और लोगों से इस पर सुझाव मांगे हैं. FSSAI की वेबसाइट के मुताबिक, सुझाव देने की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर 2026 है.












