नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता और वीटो पावर के लिए भारत कई साल से मजबूत दावेदारी ठोक रहा है। हालांकि चीन के अड़ंगे की वजह से यह अब तक संभव नहीं हो पाया है। लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि दुनिया भारत की संभावनाएं और ताकत दोनों का अंदाजा लगा चुकी है।
शायद इसीलिए चीन भी नहीं चाहता कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बने। आपको बता दें कि अब तक सिर्फ अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के पास ही वीटो पावर है। वहीं यूरोप के चार देशों ने भारत की स्थायी सदस्यता के लिए जोरदार समर्थन दिया है। इनमें स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी और चेक रिपब्लिक शामिल हैं।
स्लोवाकिया के विदेस मंत्री जुराज ब्लानर ने कहा, Visegrad 4 ग्रुप के सभी सदस्य इंडो पसिफिक क्षेत्र के सुपरपावर भारत का समर्थन करते हैं और उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए। आपको बता दें कि भारत कई साल से मांग कर रहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार होना चाहिए। भारत खरे-खरे शब्दों में बता चुका है कि सुरक्षा परिषद में अब निष्पक्षता नहीं रह गई है। ऐसे में इसका विस्तार करना भी जरूरी है।
8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है भारत
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इन देशों के समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि V4 देश रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से भारत के सहयोगी रहे हैं। वहीं हम लोग अब सहयोग को नई दिशा देने पर विचार कर रहे हैं। आपको बता दें कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्यों के साथ 10 अस्थायी सदस्य हैं जो कि समय-समय पर बदलते रहते हैं।
1994 से दावेदारी पेश कर रहा भारत
भारत पिछले तीस सालों से यूएनएससी में स्थायी सदस्यता की दावेदारी पेश कर रहा है। पहली बार 1994 में भारत ने 49वीं महासभा के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की मांग की थी। इसके बाद 2000 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र शिखऱ सम्मेलन में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्थायी सदस्यता का दावा ठोका था। 1945 में स्थापना के बाद संयुक्ता राष्ट्र सुरक्षा परिषद में केवल एक बार ही विस्तार हुआ है।
1965 में यूएन चार्टर में संशोधन किया गया था और इसके तहत चार इस्थायी सीटें बढ़ाकर कुल सदस्यता 11 से बढ़ाकर 15 कर दी गई थी। हालांकि पांच स्थायी सीटों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। भारत का कहना है कि इतने सालों में बहुत कुछ बदल गया है। भू राजनीतिक परिदृश्य बदल गए हैं। ऐसे में यूएनएससी अपने दकियानूसी रास्ते को नहीं छोड़ रहा है। भारत दुनियाभर में शांति अभियानों में अपने योगदान को दर्शाते हुए खुद को स्थायी सदस्यता के योग्य बताता है। इसके साथ ही भारत ग्लोबल साउथ को आवाज दे रहा है।












