नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए देश-विदेश से आने वाले छात्रों के लिए आवास, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं बेहतर देने के लिए उपराज्यपाल ने बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने छात्रों के लिए सुरक्षित, सुलभ और पर्याप्त आवास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक ‘हाई-पावर कमेटी’ के गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी है.
यह उच्चस्तरीय समिति दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में कार्य करेगी. यह अहम कदम हाल ही में सत्य निकेतन इलाके में इमारत ढहने की घटना के बाद उठाया गया है. इस हादसे ने छात्रों के लिए उपलब्ध आवासों की सुरक्षा, भीड़भाड़ और बुनियादी मानकों की भारी कमी को उजागर कर दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने इस दिशा में त्वरित और ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया.
उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री की बैठक में फैसला
यह समिति 07 सितंबर को उपराज्यपाल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए निर्णयों का परिणाम है. उस बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद भी विशेष रूप से उपस्थित थे. बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि छात्रों के लिए पीजी दिशानिर्देशों की समीक्षा की जाए, विश्वविद्यालयों, एमसीडी और डीडीए के माध्यम से वैकल्पिक छात्र आवासों की संभावना तलाशी जाए तथा खाली पड़ी सरकारी इमारतों का सदुपयोग किया जाए.
इसी विजन को अमली जामा पहनाने के लिए अब 18 सदस्यीय अंतर-विभागीय (इंटर-एजेंसी) कमेटी का गठन किया गया है. यह उच्चस्तरीय समिति केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे व्यापक अधिकार दिए गए हैं. इसके मुख्य कार्य में मांग और आपूर्ति का आकलन, दिल्ली में छात्रों की कुल मांग और उपलब्ध हॉस्टल आवासों के बीच के अंतर का सटीक आकलन करना है. आवासों का विस्तार यानि विश्वविद्यालयों, नगर निगम, विकास प्राधिकरण और अन्य सरकारी एजेंसियों के सहयोग से नए छात्र आवासों का निर्माण व विस्तार करना शामिल है.
लागू नियमों के तहत डीडीए के खाली या कम उपयोग वाले आवासों और अन्य सरकारी संपत्तियों को छात्रों के रहने योग्य बनाने की संभावनाओं की जांच करना, अतिरिक्त हॉस्टल और छात्र निवास विकसित करने के लिए उपयुक्त सरकारी भूमि या इमारतों की पहचान करना, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को अपने छात्रों के लिए सुरक्षित, किफायती और विनियमित हॉस्टल सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रेरित करना, दिल्ली में सभी संस्थागत हॉस्टलों और कानूनी रूप से पंजीकृत पीजी आवासों का एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार करना शामिल है.
छात्रों के लिए एक ऐसा सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म स्थापित करना, जहां वे असुरक्षित आवास, अत्यधिक भीड़भाड़, आग के खतरे या अन्य सुरक्षा चिंताओं की रिपोर्ट समयबद्ध तरीके से दर्ज करा सकें. छात्र आवासों के लिए मानक आपातकालीन निकासी और आपदा-प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल तैयार करना और मॉक ड्रिल और जागरूकता के तहत छात्रों, हॉस्टल वॉर्डनों, विश्वविद्यालय के अधिकारियों और पीजी संचालकों के लिए समय-समय पर फायर/डिजास्टर मॉक ड्रिल और सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना है.
18 सदस्यीय समिति की संरचना
यह समिति विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी. इसमें वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हैं. इसके अध्यक्ष मंत्री आशीष सूद को बनाया गया है. इसके अलावे मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त, एनडीएमसी के अध्यक्ष, एमसीडी के कमिश्नर, डीडीए के उपाध्यक्ष, गृह विभाग, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शहरी विकास विभाग, कानून विभाग, पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रधान सचिव, मुख्य अग्निशामक अधिकारी, डीयू के कुलपति समेत अन्य विश्वविद्यालय के कुलपति सदस्य होंगे. इसके अलावा, कमेटी को आवश्यकतानुसार किसी भी अन्य विभाग, एजेंसी, तकनीकी विशेषज्ञ या संस्थागत प्रतिनिधि को सह-योजित करने का पूर्ण अधिकार दिया गया है.
60 दिनों में सौंपनी होगी रिपोर्ट
प्रशासन ने इस गंभीर मुद्दे पर तेजी से काम करने का निर्णय लिया है. नवगठित हाई-पावर कमेटी को अपने गठन की तारीख से 60 दिनों के भीतर अपनी ठोस सिफारिशें और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि इस समिति की सिफारिशों के लागू होने से दिल्ली में पढ़ाई करने आने वाले लाखों छात्र-छात्राओं को सुरक्षित, किफायती और मानकीकृत आवास मिल सकेगा, जिससे भविष्य में ऐसी किसी भी दुर्घटना की पुनरावृत्ति को रोका जा सके.












