लखनऊ। उत्तर प्रदेश अब एक ‘डिजिटल-फर्स्ट’ राज्य के रूप में तेजी से उभर रहा है. राज्य सरकार ने ई-गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ग्रामीण ब्रॉडबैंड नेटवर्क के विस्तार को अपनी प्राथमिकता बनाया है. ‘डिजिटल उत्तर प्रदेश’ के दृष्टिकोण के तहत, तकनीक का उपयोग सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता लाने, भ्रष्टाचार को कम करने और सेवाओं की पहुंच आसान बनाने के लिए किया जा रहा है. प्रशासनिक कार्यों से लेकर कृषि, कानून व्यवस्था और शिक्षा तक, हर क्षेत्र को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है.
नागरिक सेवाओं का डिजिटलीकरण और ई-डिस्ट्रिक्ट की बड़ी सफलता
राज्य में ‘ई-डिस्ट्रिक्ट उत्तर प्रदेश’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों को जाति, आय, निवास, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र और पेंशन जैसी प्रमुख सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं. नागरिक अब बिना सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए इन सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं. इसके अलावा, परिवहन विभाग के ‘वाहन’ और ‘सारथी’ पोर्टल के जरिए 49 संपर्क रहित सेवाएं दी जा रही हैं. इन पहलों ने आम जनता का समय बचाते हुए प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अभूतपूर्व सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित की है.
स्मार्ट पुलिसिंग और सुरक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक का समावेश
उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तकनीक को पूरी तरह अपना लिया है. आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए ‘यूपी-112’ सेवा, स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम और ‘त्रिनेत्र’ जैसे क्रिमिनल इंटेलिजेंस डेटाबेस का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा रहा है. अपराध विश्लेषण और साइबर क्राइम निगरानी तंत्र के माध्यम से अपराधियों पर नजर रखी जा रही है. शहर में ट्रैफिक प्रबंधन और एकीकृत संचार प्लेटफॉर्म के जरिए पुलिस अब आपातकालीन स्थितियों में तुरंत और बेहतर प्रतिक्रिया देने में पूरी तरह सक्षम हो चुकी है.
प्रोजेक्ट गंगा और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति की शुरुआत
ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार करने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026 में ‘प्रोजेक्ट गंगा’ की शुरुआत की है. इस पहल के शुरुआती चरण में 21 जिलों के 20 लाख परिवारों तक इंटरनेट पहुँचाया जा रहा है. इसका अंतिम लक्ष्य 57,000 ग्राम पंचायतों को जोड़ना है. इसके अंतर्गत ग्राम पंचायत सचिवालयों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं. साथ ही, युवाओं और महिलाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में प्रशिक्षित करके बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बनाए जा रहे हैं.
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान का अभूतपूर्व विकास
राज्य में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए विभिन्न सरकारी योजनाओं, पेंशन और छात्रवृत्ति का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में बिना किसी मध्यस्थ के भेजा जा रहा है. उत्तर प्रदेश में 207 योजनाओं के तहत प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये हस्तांतरित किए जा रहे हैं, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगी है. इसके साथ ही, यूपीआई और क्यूआर कोड के बढ़ते उपयोग से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कैशलेस लेनदेन काफी बढ़ा है. ‘बीसी सखी’ योजना ने गांवों में वित्तीय समावेशन को और मजबूत किया है.
भविष्य की तैयारी: लखनऊ में देश की पहली एआई सिटी का निर्माण
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लखनऊ को देश की पहली ‘एआई सिटी’ के रूप में विकसित किया जा रहा है. राज्य सरकार ने डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के साथ समझौता किया है और विशाल कंप्यूट कॉरिडोर स्थापित करने का लक्ष्य रखा है. इसके अतिरिक्त, नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे शहर प्रमुख डेटा सेंटर हब बन चुके हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में भी राज्य की हिस्सेदारी बढ़ी है, जिससे उत्तर प्रदेश देश का एक प्रमुख और सुरक्षित टेक एवं डेटा हब बनकर उभर रहा है.
निवेश मित्र 3.0 और पारदर्शी व्यापारिक प्रक्रियाओं का विस्तार
उत्तर प्रदेश में व्यापार और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘निवेश मित्र 3.0’ पोर्टल को अत्यधिक उन्नत बनाया गया है. यह एक एकल-खिड़की प्रणाली है, जिसके माध्यम से निवेशकों को विभिन्न सरकारी अनुमतियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से समय पर प्रदान किए जाते हैं. इस व्यवस्था ने कागजी प्रक्रियाओं को खत्म करके लालफीताशाही पर प्रभावी रोक लगाई है. उद्योगपति अब पारदर्शी वातावरण में आसानी से अपना व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं, जिससे राज्य में निवेश और नए रोजगार के अवसर निरंतर बढ़ रहे हैं.
गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) से पारदर्शी सरकारी खरीद
सरकारी खरीद प्रक्रिया में निष्पक्षता लाने के लिए राज्य ने ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) पोर्टल को व्यापक स्तर पर अपनाया है. उत्तर प्रदेश पूरे देश में इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सबसे अधिक खरीदारी करने वाला अग्रणी राज्य बन गया है. इस प्रणाली ने बिचौलियों और मानवीय हस्तक्षेप को समाप्त करके निविदा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है. इसके जरिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs), महिला उद्यमियों और स्थानीय विक्रेताओं को सीधे सरकारी विभागों को अपने उत्पाद बेचने का बड़ा अवसर मिला है.
डिजिशक्ति योजना द्वारा युवाओं का सशक्तिकरण और डिजिटल शिक्षा
शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल खाई को पाटने के लिए राज्य सरकार ‘डिजिशक्ति’ कार्यक्रम का सफलता पूर्वक संचालन कर रही है. इसके तहत उच्च और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को मुफ्त स्मार्टफोन और टैबलेट वितरित किए जा रहे हैं. छात्र पोर्टल के माध्यम से अपनी पात्रता जांचने के साथ-साथ ऑनलाइन शिक्षण सामग्री, डिजिटल लाइब्रेरी और ई-कौशल पाठ्यक्रमों तक आसानी से पहुंच बना पा रहे हैं. इस पहल ने युवाओं में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दिया है और उन्हें आधुनिक रोजगार के अनुकूल तैयार किया है.
भू-राजस्व प्रशासन और पारदर्शी भूमि रिकॉर्ड का आधुनिक स्वरूप
राजस्व प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए तहसीलों और भूमि रिकॉर्ड्स का तेजी से डिजिटलीकरण किया जा रहा है. ‘ऑनलाइन खतौनी’ और डिजिटल नामांतरण (म्यूटेशन) प्रक्रियाओं के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड को सार्वजनिक और सुरक्षित बनाया गया है. इसके अतिरिक्त, ब्लॉकचेन तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके भूमि विवादों को सुलझाने की प्रणाली विकसित की जा रही है. नागरिक अब अपनी जमीनों के दस्तावेज घर बैठे आसानी से देख सकते हैं, जिससे भूमि संबंधी जालसाजी और लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों में भारी कमी आई है.
मानव संपदा पोर्टल से पारदर्शी प्रशासनिक मानव संसाधन प्रबंधन
सरकारी कर्मचारियों के प्रशासनिक प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए ‘मानव संपदा’ पोर्टल लागू किया गया है. इसके माध्यम से सरकारी कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड, पदोन्नति, स्थानांतरण और छुट्टी के आवेदनों का प्रबंधन पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया है. कर्मचारियों को अब प्रशासनिक स्वीकृतियों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. इस पारदर्शी प्रणाली से जहां एक ओर सरकारी कागजी कार्रवाई में भारी कमी आई है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यकुशलता और कर्मचारियों की जवाबदेही में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है.
शहरी ई-गवर्नेंस से नागरिक जीवन स्तर में सुधार
राज्य के शहरी स्थानीय निकायों ने नागरिकों के दैनिक जीवन को आसान बनाने के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाए हैं. अब संपत्ति कर का भुगतान, भवन निर्माण योजना की स्वीकृति, जल-सीवर बिल का भुगतान और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध हैं. नागरिक अपनी शिकायतों को ऑनलाइन दर्ज करके उनकी स्थिति भी ट्रैक कर सकते हैं. इस सुव्यवस्थित व्यवस्था ने नगर निगमों की कार्यप्रणाली को अधिक उत्तरदायी बनाया है, जिससे शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर काफी बेहतर और सुविधाजनक हुआ है.












