नई दिल्ली। अगर आप अचार, पापड़, नमकीन, मिठाई, जूस या किसी दूसरे खाने-पीने के सामान का छोटा कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं, तो सरकार की एक योजना आपके लिए मददगार हो सकती है. छोटे फूड बिजनेस को शुरू करने या पहले से चल रहे कारोबार को बड़ा करने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME) चला रही है.
इस स्कीम के तहत एलिजिबिल कारोबारियों को बैंक लोन से जुड़े खर्च में सरकार की ओर से सब्सिडी मिल सकती है. प्रोजेक्ट की कुल लागत का 35% तक हिस्सा, अधिकतम ₹10 लाख तक, सब्सिडी के तौर पर दिया जा सकता है. खास बात यह है कि योजना का फोकस सिर्फ पैसा देने तक सीमित नहीं है. छोटे कारोबारियों को कारोबार बेहतर तरीके से चलाने, प्रोडक्शन बढ़ाने और स्थानीय खाद्य उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भी मदद दी जाती है.
क्या है PMFME योजना?
PMFME यानी प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना का मकसद छोटे और असंगठित फूड कारोबारियों को आगे बढ़ाना है. कई लोग घर या छोटे स्तर पर अचार, मसाले, पापड़, स्नैक्स, मिठाई, जूस और दूसरे खाद्य उत्पाद बनाते हैं, लेकिन पैसे, मशीन और सही कारोबारी जानकारी की कमी के कारण कारोबार को बड़ा नहीं कर पाते.
ऐसे कारोबारियों को इस योजना के जरिए आर्थिक और तकनीकी मदद देने की कोशिश की जाती है. स्कीम में ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ODOP) को भी बढ़ावा दिया जाता है. यानी किसी जिले में जिस स्थानीय खाद्य उत्पाद की खास पहचान है, उसके प्रोडक्शन और कारोबार को बढ़ाने पर जोर दिया जाता है.
₹10 लाख तक मिल सकती है सब्सिडी
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत लोन से जुड़ी सब्सिडी है. एलिजिबिल व्यक्ति अपने फूड प्रोसेसिंग बिजनेस के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर बैंक से लोन ले सकता है. प्रोजेक्ट की कुल लागत का 35% तक हिस्सा सब्सिडी के रूप में मिल सकता है. इसकी अधिकतम लीमिट ₹10 लाख है. जैसे अगर किसी एलिजिबल प्रोजेक्ट की लागत ₹10 लाख है, तो नियमों के मुताबिक 35% यानी करीब ₹3.5 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है. वहीं, बड़े प्रोजेक्ट में भी सब्सिडी की अधिकतम सीमा ₹10 लाख रहेगी. यह रकम आम तौर पर लाभार्थी को हाथ में कैश के रूप में नहीं दी जाती, बल्कि बैंक लोन से जुड़ी होती है. इसलिए आवेदन करने से पहले बैंक की लोन प्रोसेस और योजना की शर्तों को समझना जरूरी है.
कौन कर सकता है आवेदन?
PMFME योजना के तहत 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोग आवेदन कर सकते हैं. इसका लाभ नया फूड प्रोसेसिंग कारोबार शुरू करने वाले और पहले से छोटा कारोबार चला रहे लोगों को भी मिल सकता है, बशर्ते वे योजना की शर्तें पूरी करते हों. अगर कोई व्यक्ति स्थानीय स्तर पर अचार, पापड़, मसाले, नमकीन, मिठाई, जूस या किसी अन्य खाद्य उत्पाद का काम करता है और उसे मशीन, यूनिट या उत्पादन बढ़ाने के लिए पैसे की जरूरत है, तो वह इस योजना के लिए एलिजिबल जांच सकता है.
आवेदन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और कारोबार से जुड़े जरूरी डॉक्यूमेंट्स मांगे जा सकते हैं. आवेदन PMFME के आधिकारिक पोर्टल के जरिए किया जाता है. हालांकि, केवल आवेदन करने से सब्सिडी मिलना तय नहीं होता. एलिजिबिलिटी और प्रोजेक्ट की मंजूरी के बाद ही योजना का फायदा मिलता है.
SHG सदस्यों को भी मिलती है आर्थिक मदद
इस योजना में स्वयं सहायता समूह यानी SHG से जुड़े लोगों के लिए भी प्रावधान है. पात्र SHG सदस्य छोटे उपकरण खरीदने और शुरुआती कारोबार से जुड़े रोजमर्रा के खर्चों के लिए ₹40 हजार प्रति सदस्य तक सीड कैपिटल प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा योजना के तहत सिर्फ आर्थिक मदद पर जोर नहीं है.
छोटे कारोबारियों को टक्निकल जानकारी, कारोबार चलाने की समझ और दूसरे जरूरी सपोर्ट भी दिए जाते हैं. इससे उन्हें अपने उत्पाद की क्वालिटी सुधारने और बाजार में बेहतर तरीके से बेचने में मदद मिल सकती है.
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
इस योजना में आवेदन करने से पहले सबसे जरूरी है कि आपका बिजनेस प्लान साफ हो. प्रोजेक्ट में कितना पैसा लगेगा, मशीनरी पर कितना खर्च होगा, कच्चा माल कहां से आएगा और तैयार सामान कहां बेचा जाएगा. इन बातों की जानकारी प्रोजेक्ट रिपोर्ट में स्पष्ट होनी चाहिए. यह भी समझना जरूरी है कि 35% सब्सिडी का मतलब सरकार पूरा पैसा देगी, ऐसा नहीं है. बाकी रकम का इंतजाम आवेदक को बैंक लोन और अपने हिस्से की पूंजी के जरिए करना पड़ सकता है. आवेदन से पहले बैंक, जिला स्तर के संबंधित विभाग या योजना से जुड़े अधिकारियों से पात्रता और लोन की शर्तों की जानकारी लेना बेहतर रहेगा.












