वाराणसी। काशी में पर्यटन को प्रदेश में और गति देने के लिए गहन मंथन का लंबा दौर चला। आयोजन के दौरान अधिकारियों ने कहा कि असली दिक्कतें जमीनी स्तर पर आती हैं, जहां कई विभाग शामिल होते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम विकसित किया जा रहा है। यह सिस्टम गेम चेंजर साबित होने वाला है। इसके जरिए निवेशक यह जान सकेंगे कि कौन सा अधिकारी किस स्तर पर कितने दिनों से फाइल रोककर बैठा है।
कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति इन सुधारों की निगरानी कर रही है। राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के स्तर पर भी समान प्रयास किए जा रहे हैं। शहर के होटल ताज में आयोजित फेडरेशन आफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन आफ इंडिया (एफएचआरएआई) के 56वें वार्षिक सम्मेलन के व्यावसायिक सत्र ‘भारत की पर्यटन यात्रा को आकार देना: सरकार और उद्योग के बीच संवाद’ में पर्यटन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने होटल एवं पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, कारोबार सुगमता सुधारने तथा प्रतिभा विकास पर गहन चर्चा की।
सत्र में राजीव कपूर (महाप्रबंधक, फेयरमार्ट मुंबई एवं रोजवीन, ए मार्गन्स ओरिजिनल्स होटल), प्रतीक बासु, ज्ञानभूषण (आईएएस, वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय) और प्रदीप शेट्टी सहित अन्य प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। इस चर्चा ने एक बार फिर साफ कर दिया कि भारत का पर्यटन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है, बशर्ते अनुमति प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए और केंद्र-राज्य-स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित हो।
पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि होटल उद्योग लंबी अवधि और बड़े पूंजी निवेश वाला क्षेत्र है। इसलिए अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाना सरकार की प्राथमिकता है। वाराणसी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों के लिए ये सुधार विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यहां गंगा घाटों, मंदिरों और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई होटल परियोजनाएं बेहद जरूरी हैं। इन परियोजनाओं से न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ेंगी।
उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान में होटल स्थापित करने में औसतन 400 दिन लग जाते हैं, जबकि सिंगापुर जैसे देशों में यह प्रक्रिया मात्र 65 दिनों में पूरी हो जाती है। सिंगापुर में केवल कुछ एजेंसियां शामिल होती हैं, जबकि भारत में दर्जनों विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है। इस अंतर को पाटने के लिए केंद्र सरकार गैर-वित्तीय और नियामकीय सुधारों पर तेजी से काम कर रही है। पर्यटन मंत्रालय ने पहले ही परियोजना स्तर पर अपनी अनुमति की आवश्यकता समाप्त कर दी है।
अब निवेशकों को मंत्रालय के पास परियोजना स्वीकृति के लिए आने की जरूरत नहीं है। चर्चा में मानसिकता परिवर्तन पर भी जोर दिया गया। पहले की सोच ‘अनुमति मिले बिना कुछ नहीं’ से हटकर अब ‘जब तक प्रतिबंधित न हो, अनुमति है’ की ओर बढ़ रही है। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि केंद्र की मंशा अच्छी है, लेकिन राज्य और नगर निकाय स्तर पर इसे सही ढंग से लागू करना चुनौती बना हुआ है। कई राज्यों में सिंगल विंडो के नाम पर अन्य खिड़कियां अभी भी खुली रह जाती हैं, जिससे प्रक्रिया जटिल बनी रहती है। नीति आयोग और पर्यटन मंत्रालय मिलकर राज्यों को इन सुधारों के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
होटल उद्योग ऊर्जा की भारी खपत वाला क्षेत्र है। सस्टेनेबल यानी हरित ऊर्जा अपनाने पर लागत बढ़ जाती है। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर सरकार हरित ऊर्जा पर लाभ या सब्सिडी दे तो पूरे देश के होटल सोलर प्लांट और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे न केवल पर्यावरण बचेगा बल्कि लंबे समय में परिचालन लागत भी घटेगी। कई राज्य सरकारों ने होटल उद्योग को उद्योग का दर्जा दिया है। महाराष्ट्र में 1999 में घोषित नीति का क्रियान्वयन अब तेज होने की उम्मीद है।
उद्योग दर्जे के साथ संक्रमण काल में उच्च लागत वाले प्रोजेक्ट्स को समर्थन मिलना चाहिए। पर्यटन क्षेत्र श्रम प्रधान है। अध्ययनों के अनुसार पर्यटन में एक करोड़ रुपये के निवेश से करीब 78 रोजगार पैदा होते हैं। वाराणसी जैसे शहरों में स्थानीय स्तर पर अनुमति प्रक्रिया सरल होने से छोटे और मझोले निवेशक भी आगे आएंगे। इससे शहर की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और गंगा किनारे पर्यटन अवसंरचना मजबूत होगी।
चर्चा का एक बड़ा हिस्सा होटल उद्योग में कुशल कर्मियों की कमी पर केंद्रित रहा। प्रतिनिधियों ने बताया कि कोविड के बाद प्रवेश संख्या घटी है और उद्योग की छवि कुछ प्रभावित हुई है। कालेजों में ड्रापआउट दर ऊंची है। प्रमाणपत्र और डिप्लोमा धारकों के लिए कैरियर में ऊपर जाने के रास्ते सीमित हैं। दो साल काम करने के बाद भी आगे बढ़ने के स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। राष्ट्रीय होटल प्रबंधन परिषद नए पाठ्यक्रम पर काम कर रही है। रेवेन्यू मैनेजमेंट, आधुनिक प्रापर्टी मैनेजमेंट सिस्टम, फ्रंट आफिस एक्सपोजर जैसी चीजें अब सिलेबस में शामिल की जा रही हैं।
शीर्ष 10 होटल ब्रांड्स के साथ समझौते किए गए हैं ताकि छात्र उद्योग विशेषज्ञों से सीधे सीख सकें। हर साल नए रुझानों की समीक्षा होगी। उद्योग जगत चाहता है कि स्कूल स्तर से ही आतिथ्य शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए ताकि छात्र इसे करियर के रूप में अपनाएं। एक प्रतिनिधि ने विदेश में 15 साल और भारत में 12 साल के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय स्नातक दुनिया भर के होटलों में काम कर रहे हैं, लेकिन विदेशी छात्रों और इंटर्न्स को भारत लाने की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। इससे ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ेगा। ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों को भी मानकीकरण और प्रमाणन की प्रक्रिया से जोड़ा जा सकता है ताकि ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिले।
अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने सहमति जताई कि केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर के बीच बेहतर तालमेल से ही निवेश जमीन पर उतरेगा। वाराणसी समेत पूरे उत्तर प्रदेश में पर्यटन को प्राथमिकता क्षेत्र घोषित किया गया है। अगर अनुमति प्रक्रिया तेज हुई, हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन मिला और कुशल कर्मियों की आपूर्ति सुनिश्चित हुई तो होटल उद्योग नई ऊंचाइयों को छू सकता है। बैठक के अंत में उद्योग पक्ष ने आशा व्यक्त की कि पर्यटन मंत्रालय इन मुद्दों को गंभीरता से ले रहा है।
वे सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं क्योंकि पर्यटन न केवल आर्थिक विकास बल्कि रोजगार सृजन का भी बड़ा माध्यम है। वाराणसी जैसे शहरों में इन सुधारों का सीधा फायदा स्थानीय युवाओं और व्यापारियों को मिलेगा। आने वाले दिनों में सिंगल विंडो सिस्टम और नियामकीय सुधारों के ठोस परिणाम दिखने की उम्मीद है।
इस सत्र ने स्पष्ट किया कि भारत का पर्यटन क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखता है। वाराणसी जैसे पवित्र नगर में पर्यटन अवसंरचना का विस्तार न केवल धार्मिक पर्यटकों को सुविधा देगा बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई दिशा देगा। होटल उद्योग में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार और उद्योग दोनों को मिलकर काम करना होगा।
सिंगल विंडो सिस्टम के सफल क्रियान्वयन से अनुमति प्रक्रिया पारदर्शी और तेज बनेगी। हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ होटलों की परिचालन लागत में कमी आएगी। प्रतिभा विकास पर फोकस से युवाओं को बेहतर करियर अवसर मिलेंगे और उद्योग को कुशल कार्यबल उपलब्ध होगा। केंद्र-राज्य समन्वय मजबूत होने से नीतियां जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होंगी।
उद्योग प्रतिनिधियों ने जोर दिया कि छोटे और मझोले निवेशकों को प्रोत्साहन देने से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। वाराणसी में गंगा घाटों के आसपास नई होटल परियोजनाएं शुरू होने से पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और शहर की छवि और निखरेगी। पर्यटन मंत्रालय द्वारा परियोजना स्तर पर अनुमति समाप्त करने का निर्णय सकारात्मक कदम है।
अब जमीनी स्तर पर विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की जरूरत है। राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से फाइलों की निगरानी संभव होगी, जिससे देरी कम होगी। कैबिनेट सचिव की समिति की निगरानी से सुधारों को गति मिलेगी। राज्य सरकारों को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी ताकि सिंगल विंडो वास्तव में एक खिड़की बने, न कि कई खिड़कियों का समूह।
हरित ऊर्जा के मुद्दे पर उद्योग ने सरकार से सहयोग की अपील की। सोलर प्लांट लगाने पर सब्सिडी या कर लाभ मिलने से होटल मालिक स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ेंगे। इससे कार्बन उत्सर्जन घटेगा और लंबे समय में बचत होगी। उद्योग दर्जा मिलने से होटलों को अन्य उद्योगों की तरह सुविधाएं मिलेंगी, जिससे निवेश आकर्षित होगा। महाराष्ट्र जैसे राज्यों का उदाहरण अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है। पर्यटन की रोजगार सृजन क्षमता को देखते हुए यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। एक करोड़ रुपये के निवेश से 78 रोजगार पैदा होने का आंकड़ा इसकी ताकत दर्शाता है।
प्रतिभा विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय होटल प्रबंधन परिषद के प्रयास सराहनीय हैं। नए पाठ्यक्रम में आधुनिक कौशल शामिल करने से छात्र उद्योग की मांग के अनुरूप तैयार होंगे। शीर्ष ब्रांड्स के साथ समझौते से व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। स्कूल स्तर से आतिथ्य शिक्षा शुरू करने से छात्रों में रुचि बढ़ेगी और उद्योग की छवि सुधरेगी। विदेशी छात्रों और इंटर्न्स को आकर्षित करने से वैश्विक ज्ञान का आदान-प्रदान होगा। आनलाइन ट्रैवल एजेंसियों के मानकीकरण से पर्यटकों को भरोसेमंद सेवा मिलेगी।
कुल मिलाकर, इस चर्चा ने पर्यटन और होटल उद्योग के भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम, नियामकीय सुधार, हरित ऊर्जा प्रोत्साहन और प्रतिभा विकास पर ध्यान केंद्रित कर भारत पर्यटन क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है। वाराणसी जैसे शहर इन सुधारों का सीधा लाभ उठाएंगे और स्थानीय विकास में योगदान देंगे। उद्योग और सरकार के बीच निरंतर संवाद से ये लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। आने वाले समय में ठोस परिणाम देखने को मिलने की उम्मीद है, जिससे पर्यटन भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनेगा।












