नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली को भविष्य की वैश्विक जरूरतों के अनुरूप ढालने और सुनियोजित विकास देने के लिए वर्षों से प्रतीक्षित मास्टर प्लान आखिरकार गुरुवार को जारी कर दी गई. शुरुआती दौर में इस योजना का खाका वर्ष 2041 की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा था, लेकिन दूरगामी सोच के साथ अंतिम समय में इसमें बड़ा बदलाव किया गया. अब इसे देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होने यानी साल 2047 तक की अनुमानित 3.2 करोड़ की आबादी और चुनौतियों को ध्यान में रखकर अपग्रेड किया गया है.
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ‘मास्टर प्लान दिल्ली 2047’ (MPD-2047) का अनावरण किया. इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू भी मौजूद थे. उन्होंने कहा यह मास्टर प्लान केवल एक शहरी विकास दस्तावेज नहीं, बल्कि दिल्ली को एक वैश्विक, समावेशी, आर्थिक रूप से जीवंत और पर्यावरण के अनुकूल राजधानी बनाने का एक महात्वाकांक्षी ब्लूप्रिंट है.
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि, जब भारत अपनी आज़ादी की शताब्दी के जश्न की ओर बढ़ रहा है, तब ‘विकसित भारत @ 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को धरातल पर उतारने और दिल्ली को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने के लिए राजधानी अब पूरी तरह तैयार है.
3.2 करोड़ की आबादी, विश्वस्तरीय सुविधाएं
दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार यह मास्टर प्लान लगभग 3.2 करोड़ की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है. केंद्रीय मंत्री खट्टर ने स्पष्ट किया कि दिल्ली अब केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और नवाचार का इंजन बनेगी. इस मास्टर प्लान का मूल मंत्र ‘विकास-उन्मुख शहरी नियोजन’ है, जो निवेश, नवाचार और रोजगार के नए द्वार खोलेगा.
नियोजित विकास और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प
MPD-2047 की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर-लेड ग्रोथ मॉडल’ है. इसका अर्थ है कि विकास वहां होगा, जहां बुनियादी ढांचा पहले से उपलब्ध है या विकसित किया जा रहा है. सड़कों, सार्वजनिक परिवहन, जलापूर्ति और डिजिटल कनेक्टिविटी को विकास का आधार बनाया गया है.
ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD): मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन और आवास को एकीकृत करने पर विशेष जोर दिया गया है. मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख परिवहन गलियारों के आसपास सघन विकास किया जाएगा, ताकि लोग अपने कार्यस्थलों के करीब रह सकें और यात्रा का समय कम हो.
आर्थिक गलियारे और औद्योगिक क्लस्टर: दिल्ली को निवेश-सुलभ बनाने के लिए आधुनिक वाणिज्यिक जिले और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे. नरेला में 138 हेक्टेयर में फैला ‘एजुकेशन हब’ एक प्रमुख आकर्षण होगा, जो तकनीक और उद्यमिता का केंद्र बनेगा.
2047 तक दिल्ली में 40 लाख अतिरिक्त घरों की जरूरत
दिल्ली की बढ़ती आबादी का बोझ साझा करने के लिए वर्ष 2047 तक लगभग 40 लाख अतिरिक्त आवासीय इकाइयों की आवश्यकता होगी. इसे पूरा करने के लिए DDA ने ‘लैंड पूलिंग’ और ‘पुनर्विकास’ की दोहरी रणनीति अपनाई है. मौजूदा कॉलोनियों और कम घनत्व वाले क्षेत्रों का पुनर्विकास किया जाएगा ताकि जमीन का बेहतर उपयोग हो सके. स्लम और जेजे क्लस्टर का इन-सीटू विकास के तहत ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ के सिद्धांत पर स्लमवासियों को गरिमापूर्ण आवास उपलब्ध कराए जाएंगे. अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण (Regularization) के तहत इन क्षेत्रों में बेहतर सड़कें, सीवर और सामुदायिक सुविधाएं प्रदान कर उन्हें औपचारिक शहरी ढांचे में शामिल किया जाएगा. एयरपोर्ट, सैन्य क्षेत्र को छोड़ अन्य इलाकों में निर्माण कार्य में ऊंचाई की सीमा में रियायत दी गई है.
पर्यावरण संरक्षण: दिल्ली के ग्रीन कवर पर विशेष ध्यान
पर्यावरण के प्रति बढ़ती चिंताओं को देखते हुए, मास्टर प्लान में ‘ग्रीन-ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर’ को परिभाषित किया गया है. वर्तमान में दिल्ली का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा हरे कवर के अंतर्गत है. MPD-2047 का लक्ष्य इसे और बढ़ाना है. यमुना बाढ़ के मैदानों का जीर्णोद्धार, नए शहरी जंगल और पारिस्थितिक गलियारों का निर्माण इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं.
परिवहन और गतिशीलता: वाहनों से ऊपर नागरिक
मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन, पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों को प्राथमिकता दी गई है. मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) और रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का विस्तार करके दिल्ली को एनसीआर के प्रमुख शहरों जैसे मेरठ, पानीपत और करनाल से जोड़ा जाएगा.
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और पर्यटन
दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए मास्टर प्लान में ‘विरासत संरक्षण’ को ‘शहरी पुनरुत्थान’ के साथ जोड़ा गया है. पर्यटन को आर्थिक विकास का एक प्रमुख चालक मानते हुए, धरोहर स्थलों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, ताकि दिल्ली दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरे.
डिजिटल गवर्नेंस और AI का उपयोग
प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ‘डिजिटल लैंड मैनेजमेंट’ और ‘एआई-सक्षम योजना’ का उपयोग किया जाएगा. सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक सहयोगी ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, डीडीए, एमसीडी, दिल्ली मेट्रो और अन्य एजेंसियां मिलकर काम करेंगी.
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने संबोधन में कहा कि MPD-2047 का लक्ष्य केवल कंक्रीट के ढांचे खड़ा करना नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता (Ease of Living) को सुधारना है. यह मास्टर प्लान आने वाले दशकों में दिल्ली को दुनिया के सबसे जीवंत, उत्पादक और पसंदीदा महानगरों में से एक बनाने का संकल्प है. दिल्ली का यह भविष्य समावेशी होगा, जिसमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आकांक्षाओं का भी ध्यान रखा गया है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली जो एक सीमित क्षेत्रफल 1483 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है, इस दिल्ली में सर्वांगीण विकास चाहे ग्रामीण क्षेत्र हो या अनधिकृत कॉलोनी हो सभी का ध्यान रखा गया है. दिल्ली के बढ़ते ट्रांसपोर्ट, प्रदूषण को शहरी विकास की योजनाओं, को हर वर्ग के आवास, इस मास्टर प्लान का बड़ा आकर्षण है.
जब दिल्ली में अतिरिक्त बुनियादी सुविधाओं की बात करें कई पाबंदियां जो पहले लगी हुई थी उसे इस मास्टर प्लान में हटाया गया है. जनता को सुविधा हो तो ऐसे में रिहायशी क्षेत्र हो या व्यावसायिक इलाका सभी 30 मीटर रोड पर अब कमर्शियल गतिविधियां हो सकेंगे. इसी प्रकार हॉस्पिटल, हेल्थ इंफ्रा, गांव, अन-ऑथराइज्ड कॉलोनी, फ्लैट एरिया, वेयरहाउस इन सबको मास्टर प्लान में विस्तार से दिया गया है. सीएम ने कहा कि दिल्ली के लोगों के लिए ऐसा रोड मैप तैयार करने के लिए दिया गया है जो अब बदलाव लाएगा.
बता दें कि डीडीए द्वारा तैयार इस मास्टर प्लान को गत 12 अगस्त को उपराज्यपाल की अध्यक्षता में हुई डीडीए बोर्ड की मीटिंग में स्वीकृति दे दी गई थी. आगे की कार्रवाई के लिए इसे केंद्रीय मंत्री के पास भेजा गया था. केंद्र सरकार की नीतियों के अनुरूप व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने और अनुपालन के बोझ को कम करने के लिए डीडीए ने यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लॉज (UBBL)-2016 में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है.
इस सुधार के तहत अब भवन निर्माण अनुमति (बिल्डिंग परमिट) प्राप्त करने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, मुख्य कारखाना निरीक्षक, दिल्ली जल बोर्ड और वन विभाग से पहले एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है. इस कदम से प्रशासनिक देरी कम होगी और निर्माण परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी. नारायण विहार जैसे पुराने इलाकों के लिए राहत की बात ये है कि निवासियों और जन प्रतिनिधियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर मुहर लगाते हुए, प्राधिकरण ने पुरानी डीडीए निर्मित दो मंजिला आवासीय इकाइयों के पुनर्निर्माण और पुनर्विकास के लिए एक एकसमान नीति को मंजूरी दे दी है.
यह नीति नारायण विहार जैसे पुराने हाउसिंग योजनाओं और दिल्ली की अन्य ऐसी ही सभी कॉलोनियों पर लागू होगी. एमपीडी-1962 के तहत बनी ये कॉलोनियां 50 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी हैं और इनकी संरचनाएं जर्जर हो चुकी हैं. खाली भूखंडों के लिए तो पुनर्विकास के स्पष्ट नियम थे, लेकिन बनी-बनाई दो मंजिला इकाइयों के लिए कोई एकसमान ढांचा नहीं था. अब इन इकाइयों को भी खाली आवासीय भूखंडों के समान ही पुनर्विकास के अधिकार दे दिए गए हैं. यह पुनर्विकास भूखंड के आकार, मौजूदा मास्टर प्लान के प्रावधानों, संरचनात्मक सुरक्षा (स्ट्रक्चरल सेफ्टी) प्रमाण पत्र, अग्नि सुरक्षा नियमों और एफएआर (FAR) के मानदंडों के दायरे में होगा.
डीडीए द्वारा घोषित मास्टर प्लान 2047 को दिल्ली के संरक्षित एवं सुरक्षित विकास के प्रति अगंभीर व दिशाहीन
शहरी मामलों के विशेषज्ञ व एकीकृत दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे जगदीश ममगांई ने डीडीए द्वारा घोषित मास्टर प्लान 2047 को दिल्ली के संरक्षित एवं सुरक्षित विकास के प्रति अगंभीर व दिशाहीन बताया है. उन्होंने कहा कि डीडीए ने न तो पिछली नाकामियों से सबक लिया और न ही भविष्य के विजन व लक्ष्य केंद्रित योजना का ढांचा तैयार किया है, लीपीपोती कर औपचारिकता पूरी की गई है. नागरिक मुद्दों जैसे बढ़ता यातायात, पार्किंग, जल भराव, प्रदूषण, जनसंख्या दबाव, कोचिंग संस्थान के निमित्त सुरक्षा मानक, अग्निशमन योजना आदि के लिए दिशा-निर्देश आदि पर चिंतन का अभाव है. मास्टर प्लान 2041 को मास्टर प्लान 2047 कर उसी प्रारुप को अधिसूचित किया गया है, जब डीडीए के उसी अगंभीर व दिशाहीन पूर्ववर्ती मास्टर प्लान को ही घोषित करना था तो साढ़े पाँच वर्ष तक लटके क्यों रखा गया?
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल का कहना है कि एमपीडी 2047 के तहत लगभग 40 लाख फ्लैट बनाए जाएंगे, अक्टूबर 2018 में तत्कालीन केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप पुरी ने भी ‘लैंड पूलिंग’ योजना के माध्यम से 17 लाख आवास बनाने का दावा किया था, लेकिन पिछले 8 वर्ष में 17 लाख घर बनाना तो दूर, डीडीए एक भी घर बनाने का काम शुरु नहीं कर सका. पिछले एमपीडी-2021 में ‘लैंड पूलिंग’ योजना प्रस्तुत की गई जिसे निजी क्षेत्र के भूमि संयोजन से दिल्ली के बुनियादी ढांचे के विकास में एक नया प्रतिमान बताया गया और जिसे 20 वर्ष बाद इन्हीं शब्दों में एमपीडी-2047 में पुनः दोहराया गया है लेकिन नए मास्टर प्लान में भी शंकाओं को संबोधित नहीं किया गया है. 5 सितंबर 2013 को लैंड पूलिंग नीति को अधिसूचित किया गया था, 5 वर्ष बाद 11 अक्टूबर 2018 को इसके निमित्त विनियमों को अधिसूचित किया गया तथा लैंड पूलिंग के माध्यम से नए क्षेत्रों का विकास कर 17 लाख आवास तैयार किए जाने का दावा था.
जगदीश ममगांई ने कहा कि दिल्ली में सवा करोड़ से अधिक वाहन हैं, एक लाख के लिए ही पार्किंग है। पार्किंग शुल्क में वृद्धि को उपकरण के रुप में उपयोग कर निजी परिवहन उपयोग को हतोत्साहित करने का दृष्टांत दिया गया है जबकि इसके लिए सार्वजनिक परिवहन में वृद्धि व अन्य विकल्प तलाशे जाने चाहिए. कोचिंग सेंटरों को वाणिज्यिक क्षेत्रों में ही अनुमति हो, प्रभावी सुरक्षा मापदंड बनाए जाने चाहे थे. दिल्ली अपनी जरुरत के लिए बिजली उत्पादन नहीं कर पाती है, पानी का भी अभाव है. वर्ष 2047 तक 3.2 करोड़ लोगों की अनुमानित जनसंख्या के लिए अतिरिक्त बिजली, पानी के प्रबन्धन की की योजना नहीं है.












