नई दिल्लीः बीजेपी उत्तर प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव गुजरात मॉडल के तौर पर लड़ने जा रही है। पार्टी ने इसका संकेत यूपी का प्रभारी विनोद तावड़े के साथ गुजरात से आने वाले जगदीश पटेल को सह-प्रभारी के तौर पर नियुक्ति से दे दिया है। असल में, उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी अब संगठन के साथ-साथ अपने सामाजिक समीकरण को भी मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में विनोद तावड़े को प्रदेश प्रभारी और जगदीश पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दिए जाने को पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश सियासी लिहाज से अहम राज्य माना जाता है। इसीलिए पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों और सांगठनिक मजबूती को देखते हुए राज्य में अपनी रणनीति को नए सिरे से धार देना शुरू कर दिया है। इस पूरी कवायद का मुख्य केंद्र बिंदु संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल करना और ‘मोदी-शाह फॉर्मूला’ को प्रभावी ढंग से लागू करना है।
क्या है बीजेपी का चुनाव जीतने का गुजरात मॉडल?
बताया जा रहा है कि बिहार जैसे राज्य में पार्टी को विजय दिलाने वाले विनोद तावड़े यूपी में घूमकर कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करेंगे वहीं, चुनाव में जीत हासिल करने के लिए गुजरात मॉडल को लागू करने की जिम्मेदारी जगदीश पटेल पर होगी। इस रणनीति में गुजरात का लिंक बेहद महत्वपूर्ण है। मोदी-शाह फॉर्मूल मूल रूप से वही सांगठनिक मॉडल है, जिसे नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने गुजरात में बीजेपी की लगातार जीत के लिए तैयार किया था।
चुनावों में गुजरात मॉडल कैसे काम करता है?
जगदीश पटेल जैसे अनुभवी सांगठनिक चेहरों को जिम्मेदारी देना बताता है कि बीजेपी गुजरात के कैडर बेस्ड चुनावी मॉडल को उत्तर प्रदेश में उतारने जा रही है। इसके तहत बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करना, ‘पन्ना प्रमुख’ व्यवस्था को सक्रिय रखना, नए चेहरों को आगे बढ़ाना और सत्ता विरोधी माहौल को समय रहते निष्प्रभावी करना शामिल है।
मोदी का चुनाव कैंपेन संभाल चुके हैं जगदीश पटेल
ऐसा नहीं है कि जगदीश पटेल उत्तर प्रदेश के लिए पैराशूट नेता हैं। उत्तर प्रदेश की धरती पर गुजरात मॉडल की तरह का करने का उनका अनुभव रहा है। गुजरात के अमराईवाड़ी के पूर्व विधायक और सूरत के पूर्व मेयर जगदीश पटेल, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैंपेन को संभालने वाली बीजेपी की कोर टीम का हिस्सा थे।
जगदीश पटेल पर मोदी-शाह को क्यों भरोसा
असल में, लोकसभा चुनाव 2024 की औपचारिक घोषणा से करीब छह महीने पहले से ही जगदीश पटेल वाराणसी में डेरा डाले हुए थे। पटेल को ऐसे व्यक्ति के तौर पर देखा जा रहा है जो वाराणसी में मोदी के करीबी के तौर पर दिवंगत सुनील ओझा की जगह लेंगे।
इस इतिहास की वजह से यूपी में उनकी नई जिम्मेदारी अहम है। पटेल सिर्फ गुजरात बीजेपी के ऐसे पदाधिकारी नहीं हैं जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की ज़िम्मेदारी दी जा रही है। उन्हें प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम करने और बीजेपी के यूपी कैंपेन सिस्टम के साथ काम करने का पहले से अनुभव है।
इसलिए, इस नियुक्ति से पार्टी के सबसे अहम राज्य के संगठन में ऐसे व्यक्ति को शामिल किया जा सकता है, जो पार्टी के गुजरात-स्टाइल चुनाव मैनेजमेंट से अच्छी तरह वाकिफ है।
यूपी में गुजरात का कितना महत्व?
- चुनावों के दौरान गुजरात के नेताओं और कार्यकर्ताओं को यूपी भेजने का बीजेपी का पुराना इतिहास रहा है।
- 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में, गुजरात बीजेपी कार्यकर्ताओं की 165 सदस्यों वाली टीम को राज्य में तैनात किया गया था।
- इन कार्यकर्ताओं को विधानसभा क्षेत्रों से लेकर संगठनात्मक इकाइयों और बूथों तक की ज़िम्मेदारियां सौंपी गई थीं।
- बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए यह एक सामान्य काम है, क्योंकि अक्सर एक राज्य के कार्यकर्ताओं को उन राज्यों में भेजा जाता है जहां चुनाव होने वाले होते हैं।
- लेकिन इस तरीके का फायदा सिर्फ ज़्यादा लोग जोड़ने से कहीं ज़्यादा है।
- इस तरह की नियुक्ति से स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, संगठन की बैठकें सुनिश्चित करने, बूथ मैनेजमेंट को मजबूत करने और स्थानीय संगठन की समस्याओं की पहचान करने में मदद मिलती है।
- साथ ही, गुजरात से भेजे गए कार्यकर्ताओं को दूसरे राज्य के राजनीतिक हालात को समझने का मौका भी मिलता है।
- इससे बीजेपी के भीतर एक तरह का ‘लर्निंग नेटवर्क’ बन जाता है।
- एक राजनीतिक माहौल में ट्रेनिंग पाए चुनावी कार्यकर्ताओं को दूसरे माहौल में भेजा जाता है, और वे अपने साथ संगठन के काम करने के तरीके और अनुभव भी ले जाते हैं। इस सिस्टम का सबसे ज़्यादा फ़ायदा उठाने वाले राज्यों में से एक यूपी रहा है।












