लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बुधवार को बड़ा एक्शन लिया। ED की टीम ने सुबह करीब सात बजे रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में आजम खान से जुड़े करीब 10 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय और जेल रोड स्थित आजम खान के आवास पर भी जांच की गई। यह कार्रवाई जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की जा रही है। जांच का अहम हिस्सा मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से विश्वविद्यालय के निर्माण और दूसरी गतिविधियों में खर्च की गई रकम का स्रोत बताया जा रहा है।
494 करोड़ रुपये के खर्च का पूरा हिसाब बना सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल करीब 494 करोड़ रुपये के उस खर्च को लेकर है, जो जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर होने की बात सामने आई है। आयकर विभाग ने ट्रस्ट से विश्वविद्यालय की जमीन खरीद, निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे खर्चों का दस्तावेजों के साथ पूरा ब्योरा मांगा था। इसके साथ ही वर्ष 2015 से 2020 के बीच ट्रस्ट को हुई आय और किए गए खर्च का रिकॉर्ड भी मांगा गया। आरोप है कि ट्रस्ट अब तक इन खर्चों का पूरा और संतोषजनक ब्योरा उपलब्ध नहीं करा पाया है। इसी वजह से अब ED की जांच में फंड के स्रोत और लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं।
11 फर्मों से मिले दान की भी जांच
आयकर विभाग ने ट्रस्ट को दान के नाम पर करोड़ों रुपये देने वाली 11 संदिग्ध फर्मों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जानकारी मांगी थी। इन फर्मों से मिले पैसे और ट्रस्ट की गतिविधियों के बीच संबंध की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि ED की छापेमारी का मतलब यह नहीं है कि काला धन या मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप अभी साबित हो गए हैं। जांच एजेंसी दस्तावेजों और लेनदेन की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी।
जून में आयकर विभाग ने रद्द किया था ट्रस्ट का पंजीकरण
ED की कार्रवाई से पहले आयकर विभाग भी जौहर ट्रस्ट पर कार्रवाई कर चुका है। 23 जून को आय-व्यय का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं कराने और दूसरी अनियमितताओं के आरोपों के बीच ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया गया था। इसके बाद से ही ट्रस्ट की आर्थिक गतिविधियां जांच के घेरे में थीं। जुलाई में ED ने पुलिस और प्रशासन से आजम खान के खिलाफ दर्ज मामलों का ब्योरा भी मांगा था। इसके बाद से रामपुर में ED की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही थी।
2022 में भी जौहर विश्वविद्यालय पहुंची थी ED
जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में ED की नजर पहले भी रही है। वर्ष 2022 में ED की एक टीम विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों की शुरुआती जांच के लिए रामपुर पहुंची थी। अब एक बार फिर एजेंसी ने सीधे छापेमारी शुरू की है। इस कार्रवाई में ED की टीम दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और ट्रस्ट से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि 494 करोड़ रुपये के खर्च में कोई वित्तीय अनियमितता या मनी लॉन्ड्रिंग हुई है या नहीं।
अब आगे क्या होगा?
आजम खान पहले से ही कई मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े इस मामले में ED की ताजा छापेमारी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब जांच एजेंसी का फोकस 494 करोड़ रुपये के खर्च, ट्रस्ट की फंडिंग और 11 संदिग्ध फर्मों से हुए लेनदेन पर रहेगा। अगर जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत मिलते हैं तो ED आगे संपत्ति जब्ती और अन्य कानूनी कदम उठा सकती है। फिलहाल पूरी तस्वीर जांच और बरामद दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही साफ होगी।












