लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई दिशा देने और आम जनता को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की तैयारी में है. राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. शासन स्तर पर लेवल-1 के डॉक्टरों के 10,736 नए पद सृजित करने की योजना पर काम शुरू हो गया है.
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा मजबूती का आधार
वर्तमान में प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की कमी एक बड़ी चुनौती है. राज्य में इस समय डॉक्टरों के 6 हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं. इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
नई योजना के तहत सबसे बड़ा बदलाव पीएचसी (PHC) स्तर पर देखने को मिलेगा. अब तक के मानक के अनुसार, एक पीएचसी पर केवल एक डॉक्टर तैनात रहता था. सरकार इसे बदलकर अब प्रति पीएचसी दो डॉक्टरों की तैनाती करने जा रही है, जिससे ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं में मरीजों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. राज्य में इस समय कुल 2,976 पीएचसी संचालित हैं, जिन्हें इस नई व्यवस्था से सीधे लाभ मिलेगा.
सीएचसी (CHC) में बढ़ेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर
सिर्फ पीएचसी ही नहीं, बल्कि 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) पर भी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाएगा. इन केंद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि मरीजों को छोटी-मोटी बीमारियों के लिए बड़े शहरों या जिला अस्पतालों की दौड़ न लगानी पड़े.
जिला अस्पतालों में मिलेंगी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं
सरकार जिला अस्पतालों को ‘सुपर स्पेशियलिटी’ हब बनाने की दिशा में भी कदम उठा रही है. गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए प्रदेश के जिला अस्पतालों में न्यूरोसर्जन, न्यूरोफिजिशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट और गैस्ट्रो सर्जन जैसे विशेषज्ञों के नए पद सृजित किए जाएंगे. इसके लिए अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, अमित कुमार घोष ने महानिदेशालय से विस्तृत प्रस्ताव और रिपोर्ट मांगी है.
जनता को होगा सीधा लाभ
इस पहल का सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा. जब ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक डॉक्टर मौजूद होंगे, तो स्वास्थ्य केंद्रों पर भीड़ कम होगी और समय पर इलाज संभव हो सकेगा. विशेषज्ञों की तैनाती से गंभीर मरीजों को समय रहते बेहतर इलाज मिल पाएगा, जिससे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी. यह कदम उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को न केवल आधुनिक बनाएगा, बल्कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित होगा. सरकार का यह प्रयास जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.












