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क्या है अमित शाह का ‘क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड’ प्लान, जिससे सुरक्षित होगी भारतीय सीमा

by National Agenda
July 10, 2026
in National
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amit shah
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नई दिल्ली। भारत सरकार देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड’ का ऐलान करते हुए साफ किया कि अब सीमा सुरक्षा केवल जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक तकनीक, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, राज्य पुलिस, नागरिक प्रशासन और सीमावर्ती लोगों की भागीदारी के साथ बहुस्तरीय सुरक्षा कवच तैयार किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य भारत की सीमाओं को इजराइल और अमेरिका की तर्ज पर पूरी तरह तकनीक आधारित और अभेद्य बनाना है.

इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एंटी ड्रोन सिस्टम, स्मार्ट सेंसर, थर्मल निगरानी और एकीकृत सुरक्षा नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा. साथ ही सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर में 400 प्रतिशत बढ़ोतरी, भारत-म्यांमार सीमा पर करीब 1,610 किलोमीटर लंबी फेंसिंग और सीमावर्ती इलाकों में डेमोग्राफी पर नजर रखने जैसी योजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. सरकार का दावा है कि इन कदमों से घुसपैठ, ड्रोन के जरिये हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और सीमा पार से होने वाले अन्य सुरक्षा खतरों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी.

क्या है ‘क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड’?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लैंड बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट्स एसपी कॉन्फ्रेंस में ‘क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड’ का ऐलान किया. यह नई व्यवस्था सीमा सुरक्षा को चार मजबूत स्तंभों पर आधारित करेगी. इसमें केंद्रीय सीमा सुरक्षा बल (BSF), सीमावर्ती राज्यों की पुलिस, नागरिक प्रशासन और सीमा पर रहने वाले स्थानीय नागरिक एक साथ मिलकर काम करेंगे. इसका मकसद केवल सीमा पर निगरानी बढ़ाना नहीं, बल्कि हर स्तर पर सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान करना और किसी भी खतरे पर तुरंत कार्रवाई करना है. सरकार का कहना है कि इससे सीमा सुरक्षा पहले से ज्यादा मजबूत और प्रभावी बनेगी.

  • क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड के प्रमुख चार आधार हैं.
  • सुरक्षित और तकनीक-आधारित सीमा प्रबंधन
  • आर्थिक रूप से मजबूत सीमावर्ती क्षेत्र
  • सुरक्षा के प्रति जागरूक स्थानीय समाज
  • आधुनिक और एकीकृत सुरक्षा तंत्र

इजराइल और अमेरिका की तर्ज पर बनेगा ‘स्मार्ट बॉर्डर’

सरकार अब सीमा सुरक्षा को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस कैमरे, स्मार्ट सेंसर, थर्मल इमेजर और एंटी ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा. जहां सामान्य फेंसिंग संभव नहीं है, वहां जमीन के भीतर सेंसर और इन्फ्रारेड तकनीक से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी. एंटी ड्रोन सिस्टम संदिग्ध ड्रोन की पहचान कर उन्हें रोकने या उनके सिग्नल को निष्क्रिय करने में मदद करेगा. सरकार का लक्ष्य सीमा पर हर संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पहचान कर सुरक्षा एजेंसियों तक सूचना पहुंचाना है.

400 प्रतिशत बढ़ा सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर, अब वैज्ञानिक तरीके से होगी सुरक्षा

अमित शाह ने कहा कि पिछले वर्षों में सरकार ने सीमा क्षेत्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर में करीब 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. सीमावर्ती इलाकों में सड़कों, पुलों, संचार नेटवर्क और अन्य जरूरी सुविधाओं को तेजी से विकसित किया गया है. इसका मकसद सुरक्षा बलों की आवाजाही को आसान बनाना और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना है. गृह मंत्री ने कहा कि अब सीमा सुरक्षा को वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि भारत का बॉर्डर मैनेजमेंट दुनिया के सबसे आधुनिक सिस्टम में शामिल हो सके.

घुसपैठ रोकने के लिए डेमोग्राफी पर भी रहेगी नजर

गृह मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में अस्वाभाविक जनसंख्या बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं. इसलिए नई व्यवस्था में स्थानीय स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी तेजी से पहुंचाने का तंत्र तैयार किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि सीमाई क्षेत्रों की डेमोग्राफी में किसी भी तरह के असामान्य बदलाव पर लगातार नजर रखी जाएगी. इसका उद्देश्य घुसपैठ, अवैध गतिविधियों और सीमा पार से होने वाले संगठित प्रयासों को समय रहते रोकना है.

भारत-म्यांमार सीमा पर लगेगी पूरी फेंसिंग

सरकार भारत और म्यांमार के बीच करीब 1,610 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगभग 31,000 करोड रुपये की लागत से फेंसिंग का काम करा रही है. इस परियोजना का उद्देश्य अवैध घुसपैठ, नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियारों की स्मगलिंग और अन्य सीमा पार अपराधों पर रोक लगाना है. सरकार का मानना है कि मजबूत फेंसिंग और आधुनिक निगरानी व्यवस्था से पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा और मजबूत होगी. इसके साथ सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

‘पहला गांव’ की सोच के साथ मजबूत होंगे सीमावर्ती इलाके

अमित शाह ने कहा कि सरकार अब सीमा पर बसे गांवों को देश का ‘आखिरी गांव’ नहीं बल्कि ‘पहला गांव’ मानकर विकास कर रही है. वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत इन क्षेत्रों में रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है. सरकार का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों से पलायन रोकना और वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षा व्यवस्था का सक्रिय हिस्सा बनाना है. नई रणनीति में स्थानीय नागरिकों को सीमा सुरक्षा तंत्र की आंख और कान के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है.

15 हजार किलोमीटर लंबी सीमा के लिए तैयार हो रहा नया सुरक्षा मॉडल

अमित शाह ने कहा कि भारत की लगभग 15 हजार किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरती है. ऐसे में सीमा सुरक्षा को केवल चौकियों और जवानों तक सीमित नहीं रखा जा सकता. सरकार अब तकनीक, सुरक्षा बल, राज्य पुलिस, नागरिक प्रशासन और स्थानीय समाज को एकीकृत नेटवर्क में जोड़कर व्यापक सुरक्षा कवच तैयार कर रही है. उनका कहना है कि इस मॉडल का उद्देश्य घुसपैठ रोकने के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों को सुरक्षित, समृद्ध और अधिक जागरूक बनाना है.

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