नई दिल्ली। प्रदेश सरकार ने सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिजनों को परिवार कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को सालाना पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल छह दिसंबर को होमगार्ड दिवस के अवसर पर होमगार्ड जवानों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। उसी के तहत तैयार प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत लाभार्थी राजकीय अस्पतालों के साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी उपचार करा सकेंगे।
आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आईपीडी उपचार के लिए भी कैशलेस सुविधा उपलब्ध होगी। योजना के संचालन पर प्रति होमगार्ड स्वयंसेवक एवं अवैतनिक अधिकारी तीन हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम के हिसाब से करीब 35.50 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय आने का अनुमान है। योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साची) के माध्यम से किया जाएगा।
एक लाख से अधिक होमगार्ड व उनके परिवार को होगा लाभ
डीजी होमगार्ड डीके ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में 67 हजार होमगार्ड तैनात है। करीब 41 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इस तरह आने वाले कुछ महीनों में होमगार्ड की संख्या 1.08 लाख तक हो जाएगी। कैशलेस की सुविधा इन होमगार्ड और उनके परिवारों को मिलेगी।
तीन नए निजी विवि खोलने की अनुमति
प्रदेश में कानपुर नगर, फतेहपुर व गाजियाबाद में एक-एक कुल तीन नए निजी विश्वविद्यालयों का संचालन नए सत्र 2026-27 से होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या 56 हो जाएगी।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 के तहत मूल्यांकन के बाद तीन संस्थाओं को आशय पत्र (एलओपी) जारी करने और संचालन प्राधिकार-पत्र जारी करने की सहमति दी गई है। इसके तहत प्रायोजक संस्था स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा कानपुर नगर के बिल्हौर में 51.739 एकड़ भूमि पर महर्षि महेश योगी एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है।
यह कृषि आधारित विश्वविद्यालय होगा, जो प्रदेश में कृषि शिक्षा व अनुसंधान को नई दिशा देगा। इसके लिए उप्र निजी विश्वविद्यालय (चतुर्थ संशोधन) अध्यादेश, 2026 प्रख्यापित किया जाएगा। इसी क्रम में प्रायोजक संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग सोसाइटी, गाजियाबाद द्वारा डासना में 26.2656 एकड़ भूमि पर अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय, गाजियाबाद की स्थापना की गई है। अब यहां पर भी पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि संस्था पहले से मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित कर रही है। अब गाजियाबाद में यह विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के नए अवसर देगा। इसके लिए उप्र निजी विश्वविद्यालय (तृतीय संशोधन) अध्यादेश, 2026 प्रख्यापित होगा। वहीं प्रायोजक संस्था एंग्लो संस्कृत कॉलेज, फतेहपुर द्वारा फतेहपुर दक्षिणी में 20.45 एकड़ भूमि में ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। शहरी क्षेत्र के मानक के अनुरूप 20 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध है।
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा ने गुणवत्ता के साथ-साथ प्रसार में भी बड़ी छलांग लगाई है। 2017 तक उत्तर प्रदेश में मात्र 14 सरकारी विश्वविद्यालय थे। 2017 से अब तक 8 नए सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित हुए हैं। इसी तरह 2017 तक मात्र 27 निजी विश्वविद्यालय थे, जो अब बढ़कर 56 हो जाएंगे। तीनों प्रस्तावित विश्वविद्यालय के खुलने से युवाओं को प्रदेश में ही उच्च शिक्षा, शोध और रोजगारपरक पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे।
पंचायतों के मानदेय और वेतन पर खर्च होंगे 1498 करोड़ रुपये
प्रदेश सरकार ने सोमवार को कैबिनेट की बैठक में राज्य वित्त आयोग से वर्ष 2026-27 के लिए प्राप्त धनराशि का 10 प्रतिशत पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय, पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों पर खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस मद में 1,498 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2026-27 में राज्य वित्त आयोग के तहत पंचायतों के लिए 14,988.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसमें से 10 प्रतिशत राशि पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय, तकनीकी व प्रशासनिक कर्मचारियों के वेतन, सिविल और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए निर्धारित की गई है। मंजूर प्रस्ताव के तहत 495.89 करोड़ रुपये पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय पर खर्च होंगे। वहीं, 1,057.38 करोड़ रुपये स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) व राज्य वित्त आयोग के तहत गठित वित्त प्रकोष्ठ में राज्य, मंडल, जिला और विकासखंड स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन, मानदेय, तकनीकी व प्रशासनिक खर्चों पर खर्च किए जाएंगे।
शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे का नाम होगा परशुरामपुरी
कैबिनेट ने शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे का नाम ‘परशुरामपुरी’ करने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। यह निर्णय नगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप उसका नाम परिवर्तित करने के दृष्टिगत लिया गया है। कैबिनेट के इस फैसले से शाहजहांपुर के नगर जलालाबाद को ‘परशुरामपुरी’ के रूप में नई आधिकारिक पहचान मिलेगी। अधिसूचना जारी होने के बाद नाम परिवर्तन का फैसला प्रभावी होगा।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत स्थित कस्बा जलालाबाद का नाम ‘परशुरामपुरी’ किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। मंत्रिपरिषद ने इसे स्वीकृति दे दी। अब संबंधित विभाग द्वारा नाम परिवर्तन के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद सभी शासकीय अभिलेखों, विभागीय दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों में नगर का नाम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परिवर्तित किया जाएगा। यह कस्बा भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
पौराणिक कथाओं एवं विभिन्न ग्रंथों में भी इस स्थान का प्रमुखता से उल्लेख है। इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से नगर का नाम भगवान परशुराम के नाम पर ‘परशुरामपुरी’ किए जाने की मांग की जा रही थी। भारत सरकार द्वारा भी इस प्रस्ताव पर अनापत्ति प्रदान की थी।
गोरखपुर नगर निगम 80 करोड़, मुरादाबाद नगर निगम 50 करोड़ का म्युनिसिपल बॉण्ड करेंगे जारी
कैबिनेट ने नगर निगम गोरखपुर एवं मुरादाबाद द्वारा म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने तथा अवस्थापना विकास निधि (इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड) से क्रेडिट रेटिंग बढ़ाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले से दोनों नगर निगमों को शहरी अवसंरचना विकास के लिए बाजार से संसाधन जुटाने में सहायता मिलेगी।
वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि नगर निगम गोरखपुर द्वारा 80 करोड़ रुपये तथा नगर निगम मुरादाबाद द्वारा 50 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने के प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। दोनों नगर निगमों ने नगर निगम सदन से अनुमोदन प्राप्त करते हुए संबंधित परियोजनाओं का चयन भी कर लिया है। इससे इन दोनों शहरों में आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी तथा नगर निकायों की वित्तीय क्षमता और सुदृढ़ होगी। प्रदेश सरकार का उद्देश्य नगर निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।
शहरी अवसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न वित्तीय स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता को देखते हुए नगर निकायों में सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन, मार्केट ओरिएंटेशन तथा क्रेडिट वर्थनेस बढ़ाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय है। भारत सरकार भी अपनी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने वाले निकायों को प्रोत्साहन दे रही है। भारत सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड जारी करने पर 13 करोड़ रुपये तथा 200 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड जारी करने पर अधिकतम 26 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता है। बॉण्ड जारी करने के लिए सभी नगर निगम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रावधानों का पालन करेंगे। अमृत 2.0 की गाइडलाइंस के अंतर्गत नगर निकायों को म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसे राज्य स्तरीय सुधारों में भी शामिल किया गया है।
उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026” को कैबिनेट की मंजूरी
प्रदेश सरकार ने राज्य को देश का अग्रणी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डाटा सेंटर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2026 को सोमवार को कैबिनेट की मंजूरी दे दी। नई नीति का उद्देश्य प्रदेश में ग्रीन और एआई-रेडी डेटा सेंटरों को बढ़ावा देना, डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। सरकार ने नीति के तहत दो गीगावाट से अधिक अतिरिक्त डाटा सेंटर क्षमता विकसित करने और दो लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है।












