नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों संग हाईलेवल मीटिंग की। करीब चार घंटे चली इस मैराथन बैठक में सुधार एजेंडे पर व्यापक चर्चा पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे विभागों के बीच बनी रुकावटों (ब्यूरोक्रेटिक साइलो) को खत्म करें और सरकारी योजनाओं के खास असर पर पूरा ध्यान दें। इस अहम बैठक में भारत के लगभग 80 शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
सचिवों के साथ पीएम मोदी ने की मैराथन बैठक
सरकार लगातार अगली पीढ़ी के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है। इस बैठक में मुख्य रूप से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, डिजिटल गवर्नेंस, नियमों में ढील और ‘लास्ट-माइल डिलीवरी’ जैसे विषयों पर ध्यान दिया जाएगा। इस दौरान कैबिनेट सचिव के अलावा बैठक में प्रधानमंत्री के दो प्रधान सचिव, पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास और सभी प्रमुख विभागों के सचिव भी मौजूद रहे।
अलग-अलग प्रशासनिक सीमाओं से ऊपर उठने के निर्देश
केंद्रीय सचिवों की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सभी मंत्रालयों को अपनी अलग-अलग प्रशासनिक सीमाओं से ऊपर उठकर एक एकीकृत और ‘पूरे सरकार’ वाले नजरिए को अपनाना चाहिए। इस तालमेल को हासिल करने के लिए, उन्होंने ‘पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान’ के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल की पुरजोर वकालत की।
गतिशक्ति मास्टर प्लान से बदलेंगे हालात
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर टूल के तौर पर नहीं, बल्कि डेटा-आधारित और विभागों के बीच तालमेल बिठाने वाले एक जरूरी जरिया के तौर पर पेश किया। जो रुके हुए फैसलों में तेजी ला सकता है। ये अलग-अलग सेक्टर से जुड़े प्रोजेक्ट्स को सुचारू बना सकता है।
सचिवों के साथ बैठक में उठे ये मुद्दे
पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान, अहम विभागों के सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में लागू की जा रही प्रमुख योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उनके प्रेजेंटेशन में बताया गया कि कैसे प्रशासनिक बाधाओं को दूर किया जा रहा, जिससे कारोबारियों के लिए नियमों का पालन करने का बोझ कम हो और साथ ही नागरिकों के लिए रोजमर्रा की सरकारी सेवाएं बेहतर हों। मौजूदा वित्त वर्ष में प्रधानमंत्री के साथ सचिव-स्तर की यह पहली बड़ी बैठकों में से एक है। इसे 2026 की दूसरी छमाही के लिए सरकार की मुख्य नीतिगत प्राथमिकताओं के साथ नौकरशाही को एक सीध में लाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने पर जोर
यह बैठक नियमों को आसान बनाकर, ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देकर और मंत्रालयों-विभागों में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाकर सरकार के ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। यह बैठक देश के शीर्ष सिविल सेवकों के साथ प्रधानमंत्री की दूसरी व्यापक बातचीत है। बैठक में सरकार के प्रमुख सुधार एजेंडे, खासकर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ में और सुधार के उपायों पर चर्चा होने की उम्मीद है। वरिष्ठ अधिकारी संरचनात्मक सुधारों पर अपडेट दे सकते हैं, लागू करने की प्रगति का आकलन कर सकते हैं और उन क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं।
तय समय में रिजल्ट के महत्व पर जोर: PM
यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में रेलवे सहित कई मंत्रालयों में ’52 सप्ताह में 52 सुधार’ जैसी महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है, जिसमें इन्हें लागू करने की समय-सीमा स्पष्ट रूप से तय की गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा तय समय-सीमा के भीतर परिणाम हासिल करने के महत्व पर जोर दिया है, जिससे समय-समय पर समीक्षा सरकार के कामकाज का एक अहम हिस्सा बन गई है। इस बैठक से मंत्रालयों को प्रगति का आकलन करने, लागू करने में आ रही चुनौतियों का समाधान करने और सुधारों में तेजी लाने के लिए आपसी तालमेल मजबूत करने का मौका मिलने की उम्मीद है।












