नई दिल्ली। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र तेजी से उभरते हुए देश की तीसरी सबसे बड़ी वस्तु निर्यात श्रेणी बन गया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को इस उपलब्धि का प्रमुख आधार बताया।
मंत्री ने कहा कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग अब 13 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। कुछ वर्ष पहले तक यह क्षेत्र देश की शीर्ष 10 निर्यात श्रेणियों में शामिल होने का लक्ष्य रखता था, लेकिन लगातार प्रगति करते हुए यह 9वें, 7वें, 5वें और 4वें स्थान से आगे बढ़कर अब तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
अश्विनी वैष्णव ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ पुणे के रंजनगांव में जाबिल (Jabil) की अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैश्विक विकास का प्रमुख इंजन बन चुकी है और इसके लिए आवश्यक तकनीकी अवसंरचना का भारत में निर्माण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि आज एआई डेटा सेंटर दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ते क्षेत्र हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन डेटा सेंटरों में उपयोग होने वाले प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और घटक भारत में ही निर्मित हों।
मंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक भारत से बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात की कल्पना करना भी कठिन था, लेकिन स्पष्ट नीतियों और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण भारत आज वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभरा है।
जाबिल की नई इकाई पुणे में एआई सिस्टम, 5जी तकनीक, उन्नत नेटवर्किंग उपकरण, औद्योगिक ऊर्जा प्रणालियों और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अत्याधुनिक उत्पादों का निर्माण करेगी। यह संयंत्र न केवल घरेलू मांग को पूरा करेगा बल्कि वैश्विक बाजारों में निर्यात को भी बढ़ावा देगा।
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 11,000 रोजगार अवसर सृजित करेगी। साथ ही स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, तैयार उत्पादों और स्थानीय सप्लाई चेन के एकीकृत विकास से देश को व्यापक आर्थिक और सामाजिक लाभ प्राप्त होंगे तथा भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।










