लखनऊ। नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अपना वादा समय पर पूरा करते हुए संजय सेतु पर बड़े वाहनों की आवाजाही को भी हरी झंडी दे दी है. पुल की मरम्मत का काम तय समय में पूरा होने के बाद 16 जून 2026 से इस पुल को भारी वाहनों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है.
लाखों यात्रियों को मिलेगा सीधा फायदा
संजय सेतु पर ट्रैफिक पूरी तरह बहाल होने से उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लोगों को राहत मिली है. अब इन रूटों पर सफर करना पहले से ज्यादा आसान, सुरक्षित और तेज हो जाएगा. राहत पाने वाले जिलों में इन जिलों का नाम टॉप पर है…
बेहतर कनेक्टिविटी और तेज विकास
एनएचआई के मुताबिक, इस पुल की मरम्मत का काम पूरा होने से इन सभी जिलों के बीच चलने वाली गाड़ियों और मालवाहक ट्रकों को अब लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा. इससे न सिर्फ लाखों यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि इलाके में व्यापार और विकास को भी रफ्तार मिलेगी. अब लखनऊ-गोंडा रूट पर यात्रा बिना किसी रुकावट के की जा सकेगी.
क्यों बंद करना पड़ा था संजय सेतु?
संजय सेतु इस रूट की लाइफलाइन माना जाता है, जिससे रोजाना हजारों की संख्या में छोटे-बड़े वाहन और भारी कमर्शियल ट्रक गुजरते हैं. लंबे समय से लगातार भारी वाहनों के दबाव के कारण पुल के स्ट्रक्चर को मजबूती देने और जरूरी तकनीकी मरम्मत की सख्त जरूरत थी.
सफर को सुरक्षित बनाने के लिए एनएचआई ने इस पर मरम्मत कार्य शुरू किया था. सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए और काम को बिना किसी बाधा के समय पर पूरा करने के लिए, पुल पर से बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया गया था.
अब क्या-क्या फायदे मिलेंगे?
- पुल बंद होने की वजह से भारी वाहनों और बसों को दूसरे लंबे रास्तों से होकर जाना पड़ता था. इससे न सिर्फ यात्रियों का समय बर्बाद हो रहा था, बल्कि डीजल-पेट्रोल का खर्च भी बढ़ गया था. अब सफर सीधे, तेज और निर्बाध होगा.
- गोंडा, बहराइच और बलरामपुर जैसे जिलों से लखनऊ और बाराबंकी की मंडियों तक माल पहुंचाना अब आसान हो जाएगा. कमर्शियल ट्रकों के सीधे रूट पर आने से माल ढुलाई की लागत घटेगी, जिसका फायदा स्थानीय व्यापारियों और आम जनता को मिलेगा.
- बड़े वाहनों के डाइवर्जन की वजह से आसपास के लिंक रोड्स पर जो भारी जाम की स्थिति बन रही थी, वह अब पूरी तरह खत्म हो जाएगी. यातायात व्यवस्था सुगम होगी.
- मरम्मत के बाद अब यह पुल पूरी तरह सुरक्षित है, जिससे भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना का खतरा न के बराबर हो गया है.










