नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के विकास का खाका पेश किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल दिल्ली के सुशासन की उपलब्धियों को साझा किया, बल्कि ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को पूरा करने में दिल्ली की भूमिका को ‘विकास का इंजन’ करार दिया.
केंद्र से वित्तीय सहयोग की बढ़ाई मांग
अपनी उपलब्धियों को गिनाने के साथ ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्र सरकार के समक्ष कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय प्रस्ताव भी रखे. उन्होंने मांग की कि दिल्ली के लिए केंद्रीय सहायता का स्तर अन्य राज्यों के अनुरूप बढ़ाया जाए. जिसकी मांग पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार भी लगातार केंद्र सरकार से करती आ रही थी. साथ ही, पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग कैडर को पूरी तरह अलग करने और दिल्ली के विशिष्ट परिप्रेक्ष्य को देखते हुए सेवा क्षेत्र व प्रदूषण-मुक्त उद्योगों के लिए केंद्र की ‘भव्य योजना’ में शामिल करने का अनुरोध किया.
दिल्ली में चल रही एक लाख करोड़ की विकास परियोजनाएं
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के सफल और ऐतिहासिक कार्यकाल पर उन्हें बधाई दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच समन्वय का यह युग दिल्ली को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है. मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र के सहयोग से दिल्ली में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से रोड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. उन्होंने विशेष रूप से पड़ोसी राज्यों के साथ गठित कोऑर्डिनेशन टीम का जिक्र किया, जो राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर यमुना नदी की स्वच्छता और प्रदूषण मुक्ति के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है.
महिला सशक्तीकरण और बेटियों को सुरक्षा-समानता का तोहफा
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार की नीतियों के केंद्र में महिलाएं और बच्चे हैं. इसी संकल्प के तहत ‘समर्थ’ योजना के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों का कायाकल्प किया जा रहा है. महिलाओं के उत्पादों को वैश्विक मंच देने के लिए रानी हाट की पहल एक क्रांतिकारी कदम है. वहीं, बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए शुरू की गई ‘लखपति बिटिया योजना’ के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर एक लाख रुपये जमा करने की गारंटी दी गई है. सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं की छात्राओं को मुफ्त साइकिल देने से न केवल शिक्षा की राह आसान हुई है, बल्कि ड्रॉपआउट दर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है. कामकाजी महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट की अनुमति देकर सरकार ने उन्हें सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का सुरक्षित वातावरण प्रदान किया है.
एआई और तकनीक से लैस दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था
शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को आधार बनाकर डिजिटल क्रांति का सूत्रपात किया है. शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 75 ‘सीएम श्री स्कूल’ की स्थापना और 8,777 से अधिक स्मार्ट क्लासरूम का संचालन दिल्ली की नई पहचान बन चुके हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि अब मूल्यांकन और व्यक्तिगत शिक्षण को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा में AI को एकीकृत किया जा रहा है. साथ ही, NEEV कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं में उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया जा रहा है.
स्वास्थ्य सेवाओं का हुआ कायाकल्प
मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करते हुए सरकार ने द्वारका में देश का पहला ‘ब्रेन हेल्थ क्लिनिक’ स्थापित किया है. आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का विस्तार और 150 डायलिसिस केंद्रों का संचालन यह दर्शाता है कि आम आदमी को बेहतर इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है. नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए ‘अनमोल’ योजना और सार्वजनिक अस्पतालों में मुफ्त एमआरआई एवं सीटी स्कैन की सुविधा दिल्ली मॉडल की सफलता की कहानी बयां कर रही है.
परिवहन और पर्यावरण पर विशेष जोर
सार्वजनिक परिवहन को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में ईवी बसों का बेड़ा तेजी से बढ़ाया जा रहा है. मार्च 2027 तक दिल्ली की सड़कों पर 5,800 से अधिक ईवी बसें होंगी, जिससे प्रदूषण पर लगाम लगेगी. वहीं, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड ने मेट्रो और आरआरटीएस के सफर को सुगम बना दिया है. यमुना के पुनर्जीवन के लिए 170 एमजीडी क्षमता वाले 35 विकेंद्रीकृत एसटीपी का निर्माण दिल्ली के पर्यावरणीय भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. सीएम ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री के गतिशील नेतृत्व और दिल्ली सरकार के सामूहिक प्रयासों से हम वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में देखने के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे.










