लखनऊ: प्रदेश के सरकारी विभागों ने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए जो मुहिम छेड़ी है, धीरे-धीरे उसका असर नजर आने लगा है. वन विभाग, परिवहन विभाग, रेलवे और परिवहन निगम ने खास पहल की है. इससे पहले की तुलना में यूपी के कई जिलों का प्रदूषण स्तर कम हुआ है. पर्यावरण बेहतर हुआ है.
वन विभाग ने जंगलों की कटान पर रोक लगाई और रिकॉर्ड करोड़ों पौधे रोपित कर वनावरण बढ़ाया. इसका असर यह हुआ कि अब उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ के बाद देश में वन आवरण बढ़ाने के मामले में दूसरे स्थान पर है. इससे अब कुछ हद तक फिजाओं में जहरीली हवाओं पर कंट्रोल हुआ है.
प्रदूषण पर हो रहा असरदार नियंत्रण
परिवहन विभाग ने भी इस दिशा में अहम रोल निभाया है. यूपी के 37 जिलों में 10 साल पुराने डीजल वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई तो प्रदेश भर में 15 साल पुराने सरकारी वाहनों को सड़क से हटाकर कबाड़ घोषित कर दिया.
रेलवे का ग्रीन एनर्जी पर रेलवे का पूरा फोकस है. सभी कार्यालय सोलर पैनल से लैस किए गए हैं. स्टेशन भी सोलर पैनल से संचालित हो रहे हैं या फिर सोलर से लैस किए जा रहे हैं. परिवहन निगम ने अब डीजल बसों से तौबा करना शुरू कर दिया है. बस बेड़े में इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जा रही हैं.
पौधरोपण अभियान के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
5 जून को पर्यावरण दिवस: हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. इस मौके पर पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए और प्रदूषण का स्तर कम करने को लेकर तमाम योजनाएं तैयार की जाती हैं. उत्तर प्रदेश में अब तक पर्यावरण को बचाने के लिए कई योजनाएं लागू भी की जा चुकी हैं.
उनका मौसम पर असर भी पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश में प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए अब सरकार गंभीर है. सरकारी विभाग भी इस तरफ संजीदगी से ध्यान दे रहे हैं. यही कारण है कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर कुछ हद तक नियंत्रण स्थापित जरूर हुआ है.
हालांकि, सर्दी के मौसम में पॉल्यूशन की मात्रा बढ़ती है, लेकिन जिस तरह से अब सरकार हर तरह से डीजल वाहनों को सड़क से हटाने और उम्र पूरी कर चुके वाहनों को ठिकाने लगाने को लेकर गंभीरता दिखा रही है, उससे आने वाले दिनों में यूपी में प्रदूषण का स्तर काफी हद तक कम हो सकता है.
उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण
उत्तर प्रदेश में हर साल रिकॉर्ड पौधारोपण हो रहा है. वातावरण पर इसका असर पड़ रहा है. इसके अलावा डीजल वाहन जो लगातार फिजाओं में जहर घोल रहे हैं उन पर भी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है. ऐसे वाहनों के पुनर्पंजीयन पर कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं.
डीजल वाहनों को सड़क से हटाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को अहमियत दी जा रही है. रेलवे भी पौधरोपण पर पूरा ध्यान दे रहा है. साथ ही अपने भवनों पर बिजली का इस्तेमाल कम करके सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश को पॉल्यूशन से बचाया जा सके और पर्यावरण बेहतर किया जा सके.
2025 में पौधरोपण करते यूपी के वन मंत्री
क्या कहते हैं प्रदेश के वन मंत्री: उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरण को लेकर तमाम तरह के प्रयास कर रही है. उनका कहना है कि हमारे यहां पेड़ों का धार्मिक स्तर पर बड़ा महत्व है.
पीपल और बरगद की पूजा की जाती है. हम चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में बहुत ज्यादा पेड़ हों. पेड़ों की कटान को रोका जाए. नदियों के किनारे पेड़ हों जिससे मिट्टी के कटान न होने पाए. पेड़ों से ग्राउंड वाटर मेंटेन रहता है. पेड़ों से हमें ऑक्सीजन मिलती है.
जबसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है, तब से पिछले साल तक 242 करोड़ रिकॉर्ड पौधारोपण हो चुका है. इससे पहले भी हर साल बड़े स्तर पर पौधारोपण कराया गया है. इस बार भी रिकॉर्ड पौधारोपण की तैयारी की जा रही है.
पेड़ लगाने के साथ ही पेड़ बचाना भी हमारी जिम्मेदारी है. पर्यावरण के लिए नदियों को भी संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है. इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षित और प्रदूषण कम किया जा सके.
विभागों की पहल: लखनऊ के एआरटीओ (प्रशासन) प्रदीप कुमार सिंह का कहना है कि पर्यावरण संरक्षित करने के लिए परिवहन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है. प्रदूषण न फैले इसके लिए केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर प्रयास कर रही है.
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है. दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ ही इलेक्ट्रिक बसों को भी सब्सिडी दी जा रही है. दो पहिया वाहनों पर 5000 रुपए, चारपहिया वाहन पर 100000 रुपए और बसों को 20 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिल रही है.
यह सब्सिडी इसीलिए दी जा रही है, जिससे लोग डीजल वाहनों को छोड़कर इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ रुख करें. लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ भी रही है. इसके अलावा परिवहन विभाग ने 15 साल पुराने सरकारी वाहनों को रजिस्टर न करने का फैसला लिया है.
अब ऐसे वाहनों को स्क्रैप किया जा रहा है, जिससे यह वाहन धुआं न फेंके और पर्यावरण संरक्षित हो. इसके अलावा अब 15 साल पुराने प्राइवेट वाहनों को भी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर फिटनेस करानी होगी. अगर फिट नहीं पाए जाते हैं, तो इन्हें भी स्क्रैप किया जाएगा. इससे पॉल्यूशन में कमी आएगी. लखनऊ में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन और स्क्रैप सेंटर खोले जा चुके हैं.
पर्यावरण संरक्षण
क्या कहते हैं परिवहन निगम के अधिकारी: उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रधान प्रबंधक और प्रवक्ता अमरनाथ सहाय का कहना है कि परिवहन निगम में काफी संख्या में पौधारोपण किया जा रहा है.
मेरी अपील है कि सभी लोग एक पौधा जरूर लगाएं, जिससे हम आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ बेहतर कर सकें. उनका कहना है कि परिवहन निगम की बात की जाए तो लगातार डीजल बसों को हटाया जा रहा है. पुरानी बसों को स्क्रैप किया जा रहा है.
उनकी जगह नई एसी इलेक्ट्रिक बसें ले रही हैं, जो पर्यावरण के लिए पूरी तरह अनुकूल हैं. इसके साथ ही जो पुरानी डीजल बसें हैं, उनको इलेक्ट्रिक बसों में बदला भी जा रहा है. इससे डीजल बसों की संख्या कम हो जाएगी और हमारा पर्यावरण बेहतर हो सकेगा.










