नई दिल्ली: भारतीय रक्षा जगत के लिए शनिवार का दिन बेहद ऐतिहासिक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा. एक तरफ जहां पुणे के खड़कवासला में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड में नए कैडेट्स को देश सेवा की कसम दिलाई गई, वहीं दूसरी तरफ देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने अपनी शानदार सेवाओं के बाद वर्दी को गरिमापूर्ण विदाई दी.
उकसावे का जवाब कैसे देना है, यह ऑपरेशन सिंदूर ने सिखाया: सेना प्रमुख
पुणे के खड़कवासला स्थित तीनों सेनाओं की प्रतिष्ठित अकादमी (NDA) के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड (POP) में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी बतौर ‘रिव्यूइंग ऑफिसर’ शामिल हुए. खेतारपाल परेड ग्राउंड में 355 कैडेट्स (जिसमें 12 मित्र देशों के 24 कैडेट्स भी शामिल थे) की शानदार परेड का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने युवा सैनिकों में नया जोश भरा.
जनरल द्विवेदी ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में खतरे हमेशा वर्दी में या घोषित मोर्चों से नहीं आते. उन्होंने जोर देकर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखा दिया कि जब राष्ट्रीय इच्छाशक्ति पूरी सटीकता और दृढ़ संकल्प के साथ व्यक्त की जाती है, तो भारत उकसावे का करारा जवाब कैसे देता है. अब इस स्थापित मानक और विरासत को बनाए रखने की जिम्मेदारी देश के इन नए योद्धाओं पर है. 42 साल पहले इसी अकादमी के 65वें कोर्स और चार्ली स्क्वाड्रन से पास आउट हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का मुख्य आधार ‘जॉइंटनेस’ (तीनों सेनाओं का आपसी तालमेल) था, जो एनडीए के कैडेट्स को पहले दिन से ही सिखाया जाता है.
कार्यकाल बेहद शानदार और संतोषजनक रहा: CDS जनरल अनिल चौहान
देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को अपनी सेवा पूरी होने पर सेना को अलविदा कह दिया. राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) पर शहीदों को आखिरी बार वर्दी में श्रद्धांजलि देने और साउथ ब्लॉक में तीनों सेनाओं का औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ लेने के बाद उन्होंने नागरिक जीवन में प्रवेश किया.
विदाई से ठीक पहले देश को दिया ‘ज्वाइंट एयर डिफेंस डॉक्ट्रिन’
1981 में सेना में कमीशन पाने वाले और परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित जनरल चौहान का कार्यकाल कैबिनेट की मंजूरी के बाद 30 मई, 2026 तक के लिए बढ़ाया गया था. अपने चार दशक से लंबे करियर और बतौर सीडीएस अपने कार्यकाल पर विचार साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा यह सफर बहुत संतोषजनक और शानदार रहा.
‘गार्ड ऑफ ऑनर’ के समापन के साथ, मैं वर्दी में अपने साथियों को हमेशा के लिए विदाई देता हूं.
अपने कार्यकाल के आखिरी हफ्ते में भी उन्होंने देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘ज्वाइंट एयर डिफेंस डॉक्ट्रिन’ जारी किया. साथ ही, सशस्त्र बलों को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु उन्होंने तीन मार्गदर्शक सिद्धांत दिए, जिसे उन्होंने ‘JAI’ (जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन) का नाम दिया.










