नई दिल्ली: भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले में 25 हिंदुओं के नरसंहार के बाद 23 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान के साथ कई समझौते अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दिए थे. उन भारतीयों की मौत की पहली बरसी के बाद अब पाकिस्तान के पाप फूटकर उसे उसके गुनाहों का दंड दे रहे हैं. कराची की भीषण गर्मी में पानी की किल्लत से लोग त्राहिमाम कर रहे हैं. दो करोड़ जनता एक महीने से पानी की कटौती का सामना कर रही है. कैसे हैं हालात पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी में आइए बताते हैं.
बदरीद पर बुरा हाल
जमात ए इस्लामी (पाकिस्तान) के चेयरमैन हाफिज नईम उर रहमान ने अपनी प्रतिद्वंदी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) पर तीखा हमला बोलते हुए बिगड़ते जल संकट के गंभीर कुप्रबंधन का दोषी पीपीपी और उसकी सहयोगी पीएमएल(एन) को ठहराया है. आपको बताते चलें जमात ए इस्लामी ने ये आरोप भी लगाया कि PPP की अगुवाई वाली प्रांतीय सरकार सालों से सत्ता में होने के बावजूद कराची की दशकों पुरानी प्यास बुझाने में नाकाम रही है. पाकिस्तान की इकॉनमिक कैपिटल कराची में ये भीषण जल संकट ऐसे समय में सामने आया, जब पूरे देश में ईद उल अजहा (बकरीद) का त्योहार मनाने के लिए अतिरिक्त पानी मिलने की आस लगाए बैठा था.
क्यों हुई पाकिस्तान में पानी की किल्लत?
जम्मू-कश्मीर में अप्रैल 2024 में पाकिस्तान द्वारा पहलगाम में कराए गए आतंकवादी हमले के बाद भारत द्वारा उठाए गए दंडात्मक कदमों के चलते पाकिस्तान पहले से ही बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है. बकरीद पर पत्रकारों से बातचीत में हाफिज नईम ने कहा, ‘तमाम नागरिक समस्याओं के बावजूद कराची के लोग धार्मिक परंपराओं का पालन कर रहे हैं. जमात ए इस्लामी ने कराची में 150 से अधिक ठिकानों पर सामूहिक कुर्बानी का इंतजाम करते हुए जमात और स्थानीय समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत करने की पुरानी रस्म को निभाया.’
गहराते जल संकट पर चिंता जताते हुए जमात के चेयरमैन ने ये भी कहा, ‘बकरीद की छुट्टियों के दौरान हजारों निवासी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए परेशान रहे. PPP के नेतृत्व वाली सिंध सरकार लोगों की मदद करने में नाकाम रही. सिंध में 18 साल से पीपीपी के राज के बावजूद कराची की जल समस्या क्यों नहीं सुलझी.
मेयर मुर्तजा वहाब को दिखाया आईआ
एआईरवाई न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक जमात प्रमुख ने कहा कि पीपीपी तो झूठी है ही, कराची का मेयर मुर्तजा भी झूठा आदमी है. हाफिज नईम ने सिंध सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बोर्ड को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि 43 अरब का बजट मिलने के बावजूद बोर्ड कुर्बानी के पशुओं के अवशेषों का उचित निस्तारण और सफाई कराने में फेल रही. जमात ए इस्लामी के नेता ने कराची के मेयर मुर्तजा वहाब के उस दावे को भी चुनौती दी जिसमें कहा गया था कि शहर में जल संकट नहीं है.
टैंकर बुझा रहा शहर की प्यास
आपको बताते चलें कि पाकिस्तान के पाप, पीप बनकर फूट रहे हैं. उनसे मवाद रिस रहा है. लोगों की बद्दुआएं न सिर्फ पाकिस्तान के हुक्मरानों बल्कि पाकिस्तान के पुलिस प्रशासन वालों पर भी लग रही है. खासकर सिंधु जल समझौता रद्द होने से पाकिस्तान को अब तमाम चीजें समझ आ रही होंगी. इस बीच कराची का जल संकट लगातार गहराता जा रहा है. शहर के लगभग 70 फीसदी हिस्से के नलकों की टोटी सूखी पड़ी है. यहां काफी समय से जलापूर्ति बाधित है. भीषण गर्मी के बीच स्थानीय लोगों को महंगे निजी पानी के टैंकर मंगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है.










